ह्यूस्टन: कुछ अपराध ऐसे होते हैं जो समाज की आत्मा को झकझोर देते हैं। साल 2001 का वह काला दिन आज भी अमेरिका ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक डरावना सपना बना हुआ है। एंड्रिया ये़ट्स (Andrea Yates), वह नाम जिसने अपने ही पांच मासूम बच्चों को एक-एक करके बाथटब में डुबोकर मौत के घाट उतार दिया था। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आज 25 साल बाद एंड्रिया कहाँ हैं? चौंकाने वाली बात यह है कि उन्हें हर साल जेल (अस्पताल) से बाहर आने का मौका मिलता है, लेकिन वह हर बार इससे इनकार कर देती हैं।
वह खौफनाक सुबह और 5 मासूमों की चीखें
20 जून 2001 की सुबह, ह्यूस्टन के एक शांत घर में सब कुछ सामान्य लग रहा था। एंड्रिया के पति रसेल काम पर जा चुके थे। किसी को अंदाजा नहीं था कि एंड्रिया के दिमाग में एक खतरनाक तूफान चल रहा है। ‘पोस्टपार्टम साइकोसिस’ (Postpartum Psychosis) नाम की गंभीर मानसिक बीमारी से जूझ रही एंड्रिया ने अपने बच्चों—नूह (7), जॉन (5), पॉल (3), ल्यूक (2) और नन्ही मैरी (6 महीने)—को बाथटब में ले जाकर डुबोना शुरू किया। बच्चों ने संघर्ष किया, लेकिन माँ के ऊपर सवार ‘शैतान’ ने किसी को नहीं बख्शा। वारदात के बाद उन्होंने खुद पुलिस को फोन किया और अपना जुर्म कबूल कर लिया।
कानूनी लड़ाई और फोरेंसिक मनोविज्ञान का मोड़
एंड्रिया के मामले ने पूरी दुनिया में ‘मानसिक स्वास्थ्य’ और ‘कानूनी सजा’ के बीच की बहस को छेड़ दिया। 2002 में पहले मुकदमे में उन्हें दोषी ठहराया गया और उम्रकैद की सजा मिली। हालांकि, 2006 में हुए दोबारा ट्रायल (Retrial) में कहानी पूरी तरह बदल गई। फोरेंसिक मनोवैज्ञानिकों (Forensic Psychologists) ने अदालत में साबित किया कि वारदात के वक्त एंड्रिया मानसिक रूप से इतनी बीमार थीं कि उन्हें सही और गलत का अंतर ही नहीं पता था। कोर्ट ने उन्हें ‘मानसिक रूप से विक्षिप्त’ (Not guilty by reason of insanity) मानते हुए जेल के बजाय अस्पताल भेजने का आदेश दिया।
आज कहाँ हैं एंड्रिया ये़ट्स?
एंड्रिया वर्तमान में टेक्सस के केरविले स्टेट हॉस्पिटल (Kerrville State Hospital) में रह रही हैं। यह एक हाई-सिक्योरिटी मेंटल हेल्थ फैसिलिटी है। यहाँ की जिंदगी सलाखों वाली जेल से अलग है, लेकिन पाबंदियां वैसी ही हैं। एंड्रिया यहाँ अपना समय सिलाई करने, कार्ड बनाने और अपने बच्चों की पुरानी यादों के साथ बिताती हैं।
सबसे हैरान करने वाला तथ्य यह है कि हर साल एंड्रिया के पास पैरोल या रिहाई के लिए आवेदन करने का कानूनी अधिकार होता है। उनके वकील जॉर्ज पेर्नहम के अनुसार, एंड्रिया हर साल इस अधिकार को छोड़ देती हैं। वह कभी बाहर नहीं आना चाहतीं। जानकारों का कहना है कि उन्हें अब भी अपने किए पर भारी पछतावा है और वह अस्पताल की शांत दीवारों के बीच ही खुद को सुरक्षित महसूस करती हैं।
मानसिक स्वास्थ्य की एक बड़ी चेतावनी
यह मामला सिर्फ एक अपराध की कहानी नहीं है, बल्कि यह एक चेतावनी है कि मानसिक स्वास्थ्य को नजरअंदाज करना कितना घातक हो सकता है। एंड्रिया की कहानी आज भी मनोविज्ञान के छात्रों के लिए एक केस स्टडी है, जो बताती है कि कैसे एक माँ, जो अपने बच्चों से प्यार करती थी, बीमारी के चलते उनकी जान ले बैठी।
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