अफगानिस्तान ने कहा—“अगर जंग चाहिए तो हम भी तैयार हैं”, पाक पर तगड़ी चेतावनी

अफगानिस्तान ने कहा—“अगर जंग चाहिए तो हम भी तैयार हैं”, पाक पर तगड़ी चेतावनी

तेहरे दौर की कोशिशें नाकाम — कंधार हमले के बाद रिश्ते और खट्टे हुए। कतर और तुर्की की मध्यस्थता में पाक और अफगान प्रतिनिधियों के बीच तीन राउंड शांति वार्ता हुई, पर कोई ठोस नतीजा हाथ नहीं लगा। अब अफगान सरकार ने पाकिस्तान को खुली चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर पाकिस्तान जंग चाहता है तो वह भी पूरी तरह तैयार है।

अफगान अधिकारियों का कहना है कि पाकिस्तान का “गैर-जिम्मेदाराना” रवैया और सख्त अड़ियल पॉलिसी वार्ताओं को ही अनिश्चित स्थिति में धकेल रही है। अफगान सरकार ने साफ कहा है कि वह अपनी जमीन किसी तीसरे देश के खिलाफ इस्तेमाल नहीं होने देगी और अपनी संप्रभुता और स्वतंत्रता पर किसी भी तरह की चोट बर्दाश्त नहीं करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि अपनी जनता और जमीन की रक्षा करना उनका इस्लामी और राष्ट्रीय कर्तव्य है — और इसके लिए वह हर संभव कदम उठाएंगे।

पाकिस्तान के रक्षा मंत्रियों की तानाशाही जैसे बयानबाज़ी और आक्रामक भाषणों के बीच तालिबान ने भी अपना रुख सख्ती से जाहिर कर दिया है। तालिबान ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान के मुस्लिम भाई हैं और सहयोग संभव है, लेकिन सीमाओं और संबंधों की हदों के भीतर रहकर ही। उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि अफगानिस्तान अपने “अंदरूनी सुरक्षा मामलों” में किसी विदेशी देश की दखलअंदाजी बर्दाश्त नहीं करेगा।

तालिबान ने पाकिस्तान की उन कोशिशों को भी खारिज किया जिनका इरादा अफगान धरती पर दखल देकर उसे पुलिस एजेंट की तरह इस्तेमाल करने का था। तालिबान का कहना है कि वह ऐसा कोई वादा या समझौता नहीं करेगा जिसका उपयोग बाद में विदेशी दखल को सही ठहराने के लिए किया जाए। इस बयान से स्पष्ट है कि अफगान पक्ष सुरक्षा और संप्रभुता को लेकर बेहद संवेदनशील है और किसी भी ऐसे कदम का कटु जवाब दे सकता है जो उसकी सीमाओं को चुनौती दे।

पाकिस्तानी पक्ष का कहना रहा कि वह अफगानिस्तान में मौजूद कुछ आतंकवादी घटकों—खासकर तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) और उससे जुड़े नेटवर्क—को निर्णायक रूप से समाप्त करना चाहता है। इस सिलसिले में इस्लामाबाद ने लिखित गारंटी और सीमा पार हमलों को रोकने के लिए ठोस समझौते की मांग की थी। दूसरी ओर तालिबान ने जोर देकर कहा कि किसी भी कार्रवाई का ढांचा अफगान कानूनों और उसकी संप्रभुता के भीतर होना चाहिए। यही द्वंद दोनों पक्षों के बीच गतिरोध की बुनियाद बन गया।

विशेषज्ञों का मानना है कि बातचीत की असफलता और हालिया हिंसक घटनाओं ने दोनों देशों के बीच तनाव को और बढ़ा दिया है। कंधार प्रांत में पाकिस्तान के संभावित हमलों की खबरों ने अटकलों को हवा दी है कि सीमापार टकराव वापस से बढ़ सकता है। हालांकि राजनयिक चैनलों पर अभी भी कुछ संवाद जारी हैं, पर दोनों तरफ से जुबानी तंज और कठोर शब्दों ने स्थिति को नाजुक बना दिया है।

नतीजा यह है कि फिलहाल शांति वार्ता ठंडी पड़ चुकी है और दोनों देशों के संबधों में अनिश्चय ही है। अफगान सरकार की तरफ से दिए गए कड़े बयान ने यह संकेत दिया है कि वह किसी भी आक्रामकता का त्वरित और निर्णायक जवाब देने से नहीं झिझकेगा। पाकिस्तान के लिए यह संदेश साफ है — अफगान धरती पर साजिश या किसी भी तरह के सैन्य प्रयोग का परिणाम गंभीर हो सकता है। भविष्य में दोनों देशों के बीच कूटनीति और सैन्य गतिविधियों के संतुलन पर ही तय होगा कि शांति की राह फिर सम्भव हो पाएगी या नहीं।

अस्वीकरण: इस लेख में दी गई जानकारी इंटरनेट पर उपलब्ध सार्वजनिक स्रोतों से एकत्रित की गई है। पाठकों से अनुरोध है कि वे इस जानकारी को उपलब्ध स्रोतों से सत्यापित करें।

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  • दिव्यांशु शोध-लेखन के प्रति बेहद जुनूनी हैं।
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