जो दुनिया अब तक केवल आशंकाओं में सोच रही थी, पाकिस्तान के एक पूर्व शीर्ष राजनयिक ने उसे सरेआम शब्दों में उतारकर दक्षिण एशिया में सनसनी फैला दी है। Abdul Basit का यह दावा कि अमेरिका की किसी भी सैन्य कार्रवाई का बदला पाकिस्तान भारत के महानगरों से लेगा, केवल एक बयान नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में ‘होस्टेज लॉजिक’ (Hostage Logic) की खतरनाक वापसी है। आज यह समझना ज़रूरी है कि क्यों एक परमाणु संपन्न देश अपनी संप्रभुता बचाने के लिए पड़ोसी देश को ढाल बना रहा है।
हैरान करने वाली बात यह है कि SIPRI (Stockholm International Peace Research Institute) की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान के पास वर्तमान में लगभग 170 परमाणु हथियार हैं। बासित का यह तर्क कि “हम अमेरिका को तो नहीं मार सकते, इसलिए भारत को निशाना बनाएंगे”, परमाणु सिद्धांत के उस ‘डेटरेंस’ (Deterrence) को ही खत्म कर देता है जिस पर पिछले 7 दशकों से वैश्विक शांति टिकी हुई है। यह कूटनीतिक हताशा का वह नया मोड़ है, जो भारत-पाक संबंधों को एक बेहद संवेदनशील ज़ोन में ले आया है।
यह भी पढ़ें:NASA का महाबली रॉकेट फिर मैदान में: क्या चंद्रमा की दूरी अब बस कुछ हफ्तों की है?
170 परमाणु बम और ‘होस्टेज लॉजिक’: Pakistan की खतरनाक चाल?
भारत में पाकिस्तान के पूर्व उच्चायुक्त अब्दुल बासित ने एक पॉडकास्ट के दौरान जो कहा, वह किसी भी सभ्य देश के राजनयिक मानदंडों के खिलाफ है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि अमेरिका पाकिस्तान पर हमला करता है, तो इस्लामाबाद का प्रतिशोध वाशिंगटन के बजाय दिल्ली और मुंबई की ओर मुड़ेगा। बासित के अनुसार, चूंकि भारत और अमेरिका के रणनीतिक संबंध अब ‘अटूट’ हो चुके हैं, इसलिए भारत को ‘प्रॉक्सि टारगेट’ (Proxy Target) बनाना ही पाकिस्तान के लिए सबसे व्यावहारिक विकल्प है।
यह भी पढ़ें:रफ्तार के शौकीन सिंघानिया की जिंदगी में समंदर का ‘तूफान’, मालदीव में पलटी स्पीडबोट: क्या जोखिम बना खतरा?
यह मानसिकता दरअसल पाकिस्तान की उस ‘लेटरल एस्केलेशन’ (Lateral Escalation) रणनीति का हिस्सा है, जिसे अक्सर सैन्य गलियारों में चर्चा का विषय बनाया जाता रहा है। पाकिस्तान की डीप-स्टेट का मानना है कि अमेरिका को सीधे तौर पर सैन्य नुकसान पहुँचाना लगभग असंभव है, लेकिन भारत पर हमला करके वह अमेरिका को मजबूर कर सकता है कि वह पीछे हट जाए। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान केवल बासित की निजी राय नहीं है, बल्कि पाकिस्तान के भीतर मौजूद उस कट्टरपंथी सोच का प्रतिबिंब है जो भारत को हर संकट की जड़ मानती है।
US और India की दोस्ती से बौखलाहट: क्यों बदलेगा पाकिस्तान?
पिछले कुछ वर्षों में भारत और अमेरिका के बीच iCET (Initiative on Critical and Emerging Technology) और ‘मेजर डिफेंस पार्टनर’ जैसे समझौतों ने पाकिस्तान को रणनीतिक रूप से अलग-थलग कर दिया है। Abdul Basit की यह धमकी इसी अलगाव की छटपटाहट है। जब पाकिस्तान यह देखता है कि वाशिंगटन अब उसे ‘आतंकवाद के केंद्र’ के रूप में देखता है और भारत को ‘नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर’, तो उसकी रक्षा नीति पूरी तरह से असंतुलित हो जाती है।
राजनयिक हलकों में चर्चा है कि पाकिस्तान अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ‘न्यूक्लियर ब्लैकमेल’ के पुराने कार्ड को फिर से खेल रहा है। FATF की ग्रे लिस्ट से बाहर आने की कोशिशों के बीच ऐसे बयान पाकिस्तान की विश्वसनीयता पर गंभीर सवालिया निशान लगाते हैं। अगर एक पूर्व उच्चायुक्त खुलेआम दिल्ली और मुंबई को तबाह करने की बात करता है, तो यह वैश्विक समुदाय के लिए स्पष्ट संकेत है कि पाकिस्तान के परमाणु हथियार कितने असुरक्षित हाथों या कितनी गैर-जिम्मेदाराना सोच के अधीन हैं।
दिल्ली-मुंबई ही क्यों? Abdul Basit की धमकी के पीछे का गणित
बासित ने अपनी धमकी में विशेष रूप से मुंबई और दिल्ली का नाम लिया है, जो महज इत्तेफाक नहीं है। मुंबई भारत की आर्थिक राजधानी है और दिल्ली सत्ता का केंद्र। इन दोनों शहरों पर हमले की बात कहकर बासित दरअसल भारतीय अर्थव्यवस्था और राजनीतिक स्थिरता को अस्थिर करने का संकेत दे रहे हैं। 26/11 के मुंबई हमलों के बाद से ही पाकिस्तान की रणनीति हमेशा से भारत के आर्थिक केंद्रों को चोट पहुँचाने की रही है, ताकि देश की विकास दर को पटरी से उतारा जा सके।
यह भी पढ़ें:ट्विटर डील पर बड़ा फैसला: क्या एलन मस्क का ‘गेम प्लान’ उल्टा पड़ गया? निवेशकों से धोखे के दोषी करार
रक्षा जानकारों का कहना है कि भारत की ‘कोल्ड स्टार्ट’ डॉक्ट्रीन और S-400 जैसे मिसाइल डिफेंस सिस्टम के आने के बाद पाकिस्तान की पारंपरिक युद्ध क्षमता काफी हद तक सीमित हो गई है। ऐसे में Abdul Basit जैसे लोग परमाणु युद्ध का डर दिखाकर भारत और अमेरिका के बीच बन रहे नए रक्षा समीकरणों में दरार पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने पूर्व में भी ऐसे बयानों को ‘बेबुनियाद और हताशापूर्ण’ करार दिया है, लेकिन परमाणु धमकी को नज़रअंदाज़ करना किसी भी देश के लिए संभव नहीं है।
आगे क्या: भारत की रणनीति और वैश्विक प्रभाव
अब सवाल यह है कि क्या अमेरिका इस धमकी को गंभीरता से लेगा? और भारत की जवाबी कार्रवाई क्या होगी? आने वाले 48 घंटों में इस पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं देखने को मिल सकती हैं। पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति इस समय बेहद नाजुक है और ऐसे में वह अमेरिका से सीधे टकराव मोल नहीं ले सकता। लेकिन भारत को बीच में लाकर वह इस मामले को एक ‘क्षेत्रीय युद्ध’ (Regional War) की शक्ल देने की कोशिश कर रहा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप का रास्ता साफ हो सके।
भारत के लिए चुनौती यह है कि वह अपनी सीमाओं पर चौकसी बढ़ाए और साथ ही वैश्विक मंच पर पाकिस्तान के इस ‘आतंकवादी और गैर-जिम्मेदाराना’ चेहरे को उजागर करे। लेकिन असली सवाल यह है कि क्या वाशिंगटन इस ब्लैकमेलिंग के आगे झुकेगा या फिर दिल्ली अपनी रक्षा रणनीति को और अधिक आक्रामक स्वरूप देगी। आने वाले दिनों में जो भी कदम उठाए जाएंगे, वे दक्षिण एशिया की पूरी सुरक्षा तस्वीर को बदल सकते हैं।
अस्वीकरण: इस लेख में दी गई जानकारी इंटरनेट पर उपलब्ध सार्वजनिक स्रोतों से एकत्रित की गई है। पाठकों से अनुरोध है कि वे इस जानकारी को उपलब्ध स्रोतों से सत्यापित करें।
