दुनिया के नक्शे पर इस वक्त एक ऐसी हलचल मची है जिसने बड़े-बड़े देशों के कान खड़े कर दिए हैं। इजरायल ने एक ऐसा कदम उठाया है जो दशकों से कोई देश नहीं उठा सका। इजरायल अब दुनिया का पहला ऐसा देश बन गया है जिसने सोमालीलैंड को एक स्वतंत्र और संप्रभु देश के रूप में आधिकारिक मान्यता दे दी है। लेकिन इस पूरी कहानी में सबसे बड़ा ट्विस्ट तब आया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से इस पर सवाल पूछा गया। ट्रंप, जिन्हें इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू का सबसे पक्का दोस्त माना जाता है, उन्होंने इस मुद्दे पर जो कहा उसने सबको हैरान कर दिया है।
“क्या किसी को पता है सोमालीलैंड क्या है?” – ट्रंप का बेबाक अंदाज
इजरायल के इस ऐतिहासिक फैसले के बाद जब मीडिया ने डोनाल्ड ट्रंप से पूछा कि क्या अमेरिका भी सोमालीलैंड को मान्यता देने के पक्ष में है, तो ट्रंप का जवाब बिल्कुल जुदा था। उन्होंने सोमालीलैंड को मान्यता देने से साफ इनकार करते हुए अपने ही अंदाज में चुटकी ली। ट्रंप ने कहा, “क्या किसी को पता भी है कि सोमालीलैंड क्या है? सच में।”
ट्रंप के इस बयान से साफ है कि फिलहाल अमेरिका इस मुद्दे पर इजरायल के सुर में सुर मिलाने के मूड में नहीं है। जहां एक तरफ नेतन्याहू अफ्रीका में नया समीकरण बिठा रहे हैं, वहीं ट्रंप की इस बेरुखी ने अंतरराष्ट्रीय गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है।
1991 से अपनी पहचान की जंग लड़ रहा है सोमालीलैंड
आपको बता दें कि सोमालीलैंड कोई नया नाम नहीं है। साल 1991 में ही इसने खुद को सोमालिया से अलग और आजाद घोषित कर दिया था। लेकिन पिछले 34 सालों से दुनिया के किसी भी देश ने इसे आधिकारिक तौर पर ‘देश’ नहीं माना था। पिछले साल ही राष्ट्रपति अब्दिरहमान मोहम्मद अब्दुल्लाही ने सोमालीलैंड की कमान संभाली थी। ऐसे में इजरायल का यह फैसला उनके कार्यकाल की अब तक की सबसे बड़ी कूटनीतिक जीत मानी जा रही है।
क्यों भड़का हुआ है सोमालिया और अफ्रीकी संघ?
इजरायल के इस कदम ने अफ्रीका में तनाव की आग सुलगा दी है। सोमालिया के विदेश मंत्रालय ने इस पर बेहद तीखी प्रतिक्रिया दी है। सोमालिया का कहना है कि इजरायल जानबूझकर इस क्षेत्र की शांति में खलल डाल रहा है।
वहीं, अफ्रीकी संघ (African Union) ने भी इजरायल की कड़ी निंदा की है। संघ का कहना है कि सोमालिया की एकता और अखंडता से छेड़छाड़ करने की कोई भी कोशिश न केवल इस महाद्वीप की स्थिरता के लिए खतरा है, बल्कि इसके नतीजे भविष्य में बहुत भयानक हो सकते हैं। जानकारों का मानना है कि इस कदम से अफ्रीका के कई अन्य हिस्सों में भी अलगाववाद की मांग उठ सकती है।
नेतन्याहू का ‘मास्टर स्ट्रोक’ और अब्राहम समझौता
इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस फैसले को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह ‘अब्राहम समझौते’ की भावना के अनुरूप है। नेतन्याहू ने न सिर्फ सोमालीलैंड को मान्यता दी, बल्कि वहां के राष्ट्रपति अब्दुल्लाही को इजरायल आने का न्यौता भी दे दिया है। नेतन्याहू का मानना है कि यह दोनों देशों के बीच एक मजबूत रणनीतिक साझेदारी की शुरुआत है। इजरायल की नजर सोमालीलैंड के जरिए अफ्रीका के रेड सी (लाल सागर) वाले इलाके में अपनी पैठ मजबूत करने पर है।
अब देखना यह होगा कि क्या इजरायल के पीछे-पीछे कुछ और देश भी सोमालीलैंड को मान्यता देते हैं, या फिर सोमालिया और अफ्रीकी संघ के विरोध के आगे यह फैसला नए संकट को जन्म देगा।
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