मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच अब अफ्रीका के एक हिस्से को लेकर अंतरराष्ट्रीय राजनीति गरमा गई है। सोमालिया से अलग हुए ‘सोमालीलैंड’ को एक स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता देने के इजरायल के फैसले ने मुस्लिम जगत में खलबली मचा दी है। इस कदम के खिलाफ दुनिया के 21 मुस्लिम देशों ने एकजुट होकर एक साझा मोर्चा खोल दिया है और इजरायल को सख्त लहजे में चेतावनी दी है।
इन दिग्गज देशों ने जताई आपत्ति
इजरायल के इस फैसले के खिलाफ आवाज उठाने वालों में सऊदी अरब, ईरान, तुर्की और पाकिस्तान जैसे प्रभावशाली देश शामिल हैं। इतना ही नहीं, ‘ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन’ (OIC) ने भी इजरायल की इस हरकत की कड़े शब्दों में निंदा की है।
जॉर्डन, मिस्र, अल्जीरिया, कुवैत, कतर, ओमान और फिलिस्तीन जैसे देशों के विदेश मंत्रियों ने साफ कर दिया है कि वे इजरायल के इस कदम को स्वीकार नहीं करेंगे। इन देशों का मानना है कि इजरायल की यह “विस्तारवादी सोच” पूरी दुनिया के लिए खतरा बन सकती है।
मुस्लिम देशों ने उठाए ये 5 बड़े सवाल
मुस्लिम देशों और OIC द्वारा जारी साझा बयान में इजरायल के खिलाफ 5 मुख्य बिंदु रखे गए हैं, जो अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल पैदा कर रहे हैं:
शांति को खतरा: मुस्लिम देशों ने 26 दिसंबर 2025 को इजरायल द्वारा सोमालीलैंड को दी गई मान्यता को सिरे से खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि यह ‘हॉर्न ऑफ अफ्रीका’ और लाल सागर ही नहीं, बल्कि वैश्विक शांति के लिए खतरा है।
कानून का उल्लंघन: इस कदम को अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र (UN) चार्टर का गंभीर उल्लंघन बताया गया है। देशों का कहना है कि किसी भी देश की क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान होना चाहिए।
सोमालिया का समर्थन: सभी 21 देशों ने एक सुर में सोमालिया की संप्रभुता का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि सोमालिया की एकता को तोड़ने वाले किसी भी प्रयास का विरोध किया जाएगा।
गलत मिसाल: बयान में कहा गया कि किसी देश के एक हिस्से को अलग मान्यता देना एक खतरनाक मिसाल कायम करेगा, जिससे भविष्य में अन्य देशों में भी अलगाववाद को बढ़ावा मिल सकता है।
फिलिस्तीन कनेक्शन: मुस्लिम देशों ने इस अंदेशा को भी खारिज किया है कि इजरायल फिलिस्तीनी लोगों को उनकी जमीन से बेदखल करने के अपने एजेंडे को छिपाने के लिए ऐसे कदम उठा रहा है।
आखिर क्या है सोमालीलैंड का मामला?
सोमालीलैंड का इतिहास काफी पेचीदा है। साल 1991 में सोमालिया के तत्कालीन तानाशाह जनरल सियाद बर्रे के खिलाफ एक बड़ा आंदोलन हुआ था, जिसके बाद सोमालीलैंड ने खुद को सोमालिया से अलग घोषित कर दिया था। लगभग 60 लाख की आबादी वाला यह क्षेत्र पिछले तीन दशकों से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक स्वतंत्र देश के रूप में पहचान पाने के लिए संघर्ष कर रहा है।
दिलचस्प बात यह है कि इजरायल दुनिया का पहला ऐसा देश बन गया है जिसने सोमालीलैंड को एक अलग राष्ट्र के रूप में आधिकारिक मान्यता दी है। इजरायल के इस “पहले कदम” ने ही अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर नई बहस छेड़ दी है।
क्या आगे बढ़ेगा तनाव?
विशेषज्ञों का मानना है कि इजरायल का यह फैसला कूटनीतिक रूप से उसे मुस्लिम देशों से और भी दूर कर सकता है। जहां एक तरफ सोमालीलैंड इस मान्यता को अपनी बड़ी जीत मान रहा है, वहीं सोमालिया और अन्य मुस्लिम देश इसे अपनी संप्रभुता पर हमला बता रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि संयुक्त राष्ट्र इस मामले पर क्या रुख अपनाता है।
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