ढाका: बांग्लादेश में इस वक्त हालात बेहद तनावपूर्ण हैं। चारों तरफ हिंसा और डर का माहौल है। हाल ही में छात्र नेता ओस्मान हादी की हत्या के बाद से देश में अराजकता बढ़ गई है, जिसका सबसे बुरा असर वहां रह रहे अल्पसंख्यकों पर पड़ रहा है। दीपू दास की मॉब लिंचिंग की खबर अभी ठंडी भी नहीं हुई थी कि उग्रवादियों ने अमृत मंडल नाम के एक हिंदू युवक की पीट-पीटकर हत्या कर दी। उस पर वसूली का झूठा आरोप लगाया गया था।
इन्हीं खौफनाक हालात के बीच बांग्लादेश में फरवरी 2026 में होने वाले आम चुनावों की सरगर्मी तेज हो गई है। सबसे चौंकाने वाली खबर यह है कि पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की पारंपरिक सीट पर एक हिंदू नेता ने चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है।
कौन हैं एडवोकेट गोविंद चंद्र प्रमाणिक?
बांग्लादेश जातीय हिंदू मोहजोते की केंद्रीय समिति के जनरल सेक्रेटरी, एडवोकेट गोविंद चंद्र प्रमाणिक ने चुनावी मैदान में उतरकर सबको हैरान कर दिया है। 12 फरवरी 2026 को होने वाले चुनावों में वह गोपालगंज-3 (कोटालीपारा-तुंगीपारा) सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर नामांकन दाखिल करने जा रहे हैं।
बता दें कि यह वही सीट है जहां से शेख हसीना चुनाव लड़ती आई हैं। ‘द डेली स्टार’ की रिपोर्ट के अनुसार, प्रमाणिक का कहना है कि वह पूरी तरह से निष्पक्ष (न्यूट्रल) हैं और उनका किसी राजनीतिक दल से कोई लेना-देना नहीं है।
हसीना की सीट से चुनाव लड़ने की क्या है वजह?
गोविंद चंद्र प्रमाणिक का मानना है कि पार्टी की राजनीति आम लोगों की आवाज को दबा देती है। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा, “राजनीतिक दलों के सांसद अक्सर अपनी पार्टी के अनुशासन में बंधे होते हैं, जिसकी वजह से वे जनता की असल समस्याओं और अल्पसंख्यकों के दर्द को संसद में नहीं उठा पाते। मैं इस दीवार को तोड़ना चाहता हूं और सीधे जनता की आवाज बनना चाहता हूं।”
हालांकि, इस सीट पर राह आसान नहीं है। प्रमाणिक के अलावा यहां से कई दिग्गज मैदान में हैं, जिनमें:
BNP से एसएम जिलानी
जमात-ए-इस्लामी के एमएम रेजाउल करीम
Gono Odhikar Parishad के अबुल बशर
NCP से अरिफुल दरिया
खौफ के साये में अल्पसंख्यक
2024 में शेख हसीना के देश छोड़ने के बाद बांग्लादेश की सत्ता में कट्टरपंथी गुटों का प्रभाव काफी बढ़ गया है। इसके बाद से हिंदू, ईसाई, सूफी और अहमदी मुसलमानों के खिलाफ हिंसा की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। कट्टरपंथियों ने भारत विरोधी भावनाओं को ढाल बनाकर अल्पसंख्यकों पर हमलों को जायज ठहराने की कोशिश की है।
मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के दौरान भी हालात में सुधार नहीं दिख रहा है। ढाका के हिंदू नेताओं का कहना है कि पुलिस जांच में ढिलाई और दोषियों को सजा न मिलने की वजह से अल्पसंख्यकों के मन में गहरा डर और अविश्वास बैठ गया है। ऐसे में गोविंद चंद्र प्रमाणिक का चुनाव लड़ना बांग्लादेश की राजनीति में एक बड़ा मोड़ साबित हो सकता है।
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