अमेरिका में ‘क्लीन एनर्जी’ की दिशा में बढ़ रहे कदमों पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ब्रेक लगा दिया है। सोमवार को ट्रंप प्रशासन ने एक ऐसा फैसला लिया जिससे पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार में हलचल मच गई है। राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए प्रशासन ने समुद्र में चल रहे सभी बड़े ‘ऑफशोर विंड प्रोजेक्ट्स’ (समुद्री पवन ऊर्जा परियोजनाएं) की लीज तुरंत प्रभाव से निलंबित कर दी है।
प्रशासन का दावा है कि समुद्र में लगी ये विशालकाय पवन चक्कियां अमेरिका के रक्षा तंत्र और रडार सिस्टम को ‘अंधा’ कर सकती हैं।
क्या है असली खतरा? क्यों फेल हो रहे रडार?
अमेरिकी गृह मंत्रालय (Interior Department) के अनुसार, यह फैसला रक्षा विभाग (Department of War) की उन गोपनीय रिपोर्टों के आधार पर लिया गया है जिनमें राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं जताई गई हैं। हालांकि, इन रिपोर्टों की पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन तकनीकी तौर पर एक बड़ा तर्क सामने आया है।
गृह मंत्री डग बर्गम ने दावा किया कि विंड टर्बाइनों की विशालकाय घूमती हुई ब्लेड और उनसे होने वाला ‘लाइट रिफ्लेक्शन’ रडार सिग्नल में बाधा (Interference) पैदा कर रहे हैं। ईस्ट कोस्ट पर लगे ये विंड फार्म रडार की निगरानी क्षमता को प्रभावित कर सकते हैं, जिससे दुश्मन के विमानों या मिसाइलों का पता लगाना मुश्किल हो सकता है।
अरबों डॉलर दांव पर, 6 गीगावॉट बिजली अटकी
ट्रंप के इस आदेश का असर केवल कागजों तक सीमित नहीं है। इससे अरबों डॉलर का निवेश सीधे तौर पर खतरे में पड़ गया है।
- 6 गीगावॉट बिजली: करीब 6 गीगावॉट बिजली उत्पादन की क्षमता अब अधर में लटक गई है।
- वर्जीनिया प्रोजेक्ट: इसमें सबसे बड़ा झटका वर्जीनिया के उस विशाल ऑफशोर विंड फार्म को लगा है, जो 2026 तक पूरा होना था। यह अमेरिका का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट बनने वाला था।
- डेटा सेंटर क्लस्टर: वर्जीनिया में दुनिया का सबसे बड़ा डेटा सेंटर क्लस्टर है, जिसे भारी मात्रा में बिजली की जरूरत है। इस रोक से वहां ऊर्जा संकट गहरा सकता है।
‘राजनीतिक प्रतिशोध’ या ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’?
इस फैसले के आते ही अमेरिका में राजनीतिक घमासान शुरू हो गया है। विपक्ष (डेमोक्रेट्स) और ऊर्जा विशेषज्ञों ने इसे ट्रंप का ‘राजनीतिक एजेंडा’ बताया है। वर्जीनिया के सीनेटर मार्क वॉर्नर और टिम केन ने कहा कि प्रशासन ने इस अचानक रोक के लिए कोई नया सबूत पेश नहीं किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रंप हमेशा से ही पवन ऊर्जा के खिलाफ रहे हैं और यह उनकी निजी नाराजगी का नतीजा है।
दूसरी तरफ, उद्योग जगत का मानना है कि इस फैसले से हजारों नौकरियां खत्म हो जाएंगी और निवेशकों का भरोसा टूटेगा। ‘नेशनल ओशन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन’ ने चेतावनी दी है कि ऑफशोर विंड कंपनियां पिछले एक दशक से रक्षा विभाग के साथ मिलकर काम कर रही थीं और सभी प्रोजेक्ट्स को पहले ही क्लीयरेंस मिल चुका था, ऐसे में अचानक रोक लगाना समझ से परे है।
आगे क्या होगा?
फिलहाल, अटलांटिक महासागर में चल रही पांच बड़ी परियोजनाओं का काम रुक गया है। रक्षा विभाग के अधिकारी अब इस बात का आकलन कर रहे हैं कि क्या रडार के इस खतरे को कम करने का कोई और तकनीकी रास्ता है। लेकिन जब तक कोई समाधान नहीं निकलता, तब तक अमेरिका के समुद्रों में लगी ये पवन चक्कियां थम सी गई हैं।
यह फैसला इस बात का भी संकेत है कि ट्रंप प्रशासन के दौरान अमेरिका की ऊर्जा नीति में ‘ग्रीन एनर्जी’ के बजाय पारंपरिक स्रोतों पर ज्यादा जोर दिया जा सकता है।
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