वियतनाम: क्या आपने कभी सुना है कि कोई इंसान खुद को मरा हुआ घोषित कर दे और फिर पांच साल तक अपनी ही मौत का प्रमाण पत्र लेकर घूमता रहे? सुनने में यह किसी फिल्मी स्क्रिप्ट जैसा लग सकता है, लेकिन वियतनाम में एक महिला ने इस हकीकत को अंजाम दिया। यह मामला न केवल हैरान करने वाला है, बल्कि इसके पीछे छिपा है एक बड़ा और शातिर बीमा धोखाधड़ी (Insurance Fraud) का खेल, जिसका अब पर्दाफाश हो चुका है।
जब ‘मुर्दा’ खुद चलकर पहुंच गया दफ्तर
यह पूरा मामला वियतनाम के थान्ह होआ प्रांत का है। 17 दिसंबर को जब गुयेन थी थू नाम की एक महिला क्वांग ट्रुंग वार्ड पीपुल्स कमेटी के दफ्तर पहुंची, तो वहां मौजूद अधिकारियों के पैरों तले जमीन खिसक गई। थू ने अधिकारियों से मांग की कि उसकी मौत का रजिस्ट्रेशन कैंसिल किया जाए क्योंकि वह जिंदा है।
रिकॉर्ड्स की जांच करने पर पता चला कि इसी नाम और पते वाली महिला को जून 2020 में ही आधिकारिक तौर पर मृत घोषित किया जा चुका था। अब सवाल यह था कि अगर वह मर चुकी थी, तो यह महिला कौन है?
ऐसे रचा गया मौत का खौफनाक नाटक
पुलिस की गहन जांच में जो सच सामने आया, उसने सबको चौंका दिया। थू ने अपने पति से तलाक लेने के बाद अपनी मां के साथ रहते हुए चार अलग-अलग जीवन बीमा पॉलिसियां (Life Insurance Policies) ली थीं। साल 2020 में आर्थिक तंगी और बीमारी का बहाना बनाकर उसने करोड़ों रुपये हड़पने की साजिश रची।
7 जून 2020 को थू ने नींद की गोलियां लीं और बाथरूम में गिरने का नाटक किया, ताकि यह एक हादसा लगे। इसके बाद उसने अपने परिवार और स्थानीय अधिकारियों को गुमराह किया। चौंकाने वाली बात यह है कि इस पूरी साजिश की जानकारी सिर्फ थू, उसकी मां और एक तांत्रिक को थी। जल्दबाजी में अंतिम संस्कार का नाटक किया गया और उसी रात थू चुपके से दूसरे प्रांत में भाग गई। वहां वह अपनी पहचान छिपाकर रहने लगी, जबकि कागजों में वह मर चुकी थी।
40 लाख रुपये का बीमा घोटाला
थू की ‘मौत’ के अगले ही दिन उसकी मां ने सरकारी दफ्तर में मृत्यु पंजीकरण कराया और बीमा कंपनियों के पास क्लेम फाइल कर दिया। दो बीमा कंपनियों से परिवार को कुल 1.2 अरब वियतनामी डोंग (लगभग 40 लाख भारतीय रुपये) मिले। इस मोटी रकम का इस्तेमाल उन्होंने संपत्ति खरीदने और निवेश करने में किया। पांच साल तक सब कुछ योजना के अनुसार चलता रहा, लेकिन थू की एक गलती ने सारा खेल बिगाड़ दिया।
एक गलती और पुलिस के हत्थे चढ़ी आरोपी महिला
पांच साल बाद जब थू को अपनी कानूनी पहचान की जरूरत महसूस हुई, तो उसने अपनी मौत का रिकॉर्ड हटवाने की कोशिश की। जैसे ही वह सरकारी दफ्तर पहुंची, अधिकारियों को शक हुआ और मामला पुलिस तक जा पहुंचा। कड़ी पूछताछ में थू ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है। फिलहाल, पुलिस ने थू और उसकी मां दोनों को हिरासत में ले लिया है और उन पर बीमा धोखाधड़ी के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
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