नई दिल्ली: अगर आप भी ओला-उबर के बढ़ते किराए और ड्राइवरों की मनमानी से परेशान हैं, तो आपके लिए एक बड़ी खुशखबरी है। केंद्र सरकार अब खुद टैक्सी बाजार में उतरने की तैयारी कर चुकी है। 1 जनवरी, 2026 को सरकार अपना नया डिजिटल राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्म ‘भारत टैक्सी (Bharat Taxi)’ लॉन्च करने जा रही है।
यह कोई साधारण ऐप नहीं होगा, बल्कि एक सहकारी (Cooperative) मॉडल पर आधारित होगा, जिसका सीधा मुकाबला ओला और उबर जैसी दिग्गज निजी कंपनियों से होगा।
क्या है भारत टैक्सी और कौन इसे चलाएगा?
केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह ने हाल ही में लोकसभा में एक लिखित जवाब के दौरान इस महत्वाकांक्षी योजना का खुलासा किया। ‘भारत टैक्सी’ का संचालन ‘सहकार टैक्सी कोऑपरेटिव लिमिटेड’ द्वारा किया जाएगा। यह संस्था मल्टी-स्टेट कोऑपरेटिव सोसाइटीज (MSCS) एक्ट, 2002 के तहत रजिस्टर्ड है। खास बात यह है कि इस सिस्टम में ड्राइवर सिर्फ कर्मचारी नहीं, बल्कि हिस्सेदार होंगे।
यात्रियों और ड्राइवरों को क्या मिलेगा खास?
सरकार का मुख्य उद्देश्य ड्राइवरों को निजी कंपनियों के भारी-भरकम कमीशन से आजादी दिलाना और यात्रियों को सुरक्षित सफर देना है।
ऐप की कुछ खास खूबियां:
जीरो कमीशन मॉडल: ओला-उबर जहां ड्राइवरों से 25-30% तक कमीशन लेते हैं, वहीं भारत टैक्सी में ड्राइवरों को उनकी मेहनत की पूरी कमाई मिलेगी।
सस्ता किराया: बिचौलियों के हटने से यात्रियों के लिए किराया पारदर्शी और कम होगा।
सुरक्षा सबसे पहले: इसमें रीयल-टाइम ट्रैकिंग, वेरिफाइड ड्राइवर और इमरजेंसी सेफ्टी फीचर्स होंगे।
सबके लिए आसान: यह ऐप कई भाषाओं में उपलब्ध होगा और इसे बुजुर्गों व दिव्यांगों की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाया गया है।
ऑटोमोबाइल सेक्टर में आएगी भारी तेजी
भारत टैक्सी के आने से केवल सफर ही आसान नहीं होगा, बल्कि कारों की बिक्री में भी उछाल आने की उम्मीद है। जानकारों का मानना है कि इस नई सर्विस की वजह से कमर्शियल वाहनों की डिमांड बढ़ेगी।
इन खिलाड़ियों को होगा बड़ा फायदा: टैक्सी बेड़े में मुख्य रूप से Maruti Dzire Tour, Hyundai Aura CNG और Tata Tigor EV जैसी सेडान गाड़ियां शामिल होंगी। इसके अलावा लंबी दूरी और एयरपोर्ट के लिए Maruti Ertiga और Toyota Rumion जैसी बड़ी गाड़ियों की मांग बढ़ेगी।
सरकार इस प्लेटफॉर्म पर Electric Vehicles (EV) और CNG वाहनों को विशेष प्राथमिकता देगी। इससे न केवल प्रदूषण कम होगा बल्कि ड्राइवरों की ईंधन पर होने वाली लागत भी घटेगी। इसका सीधा फायदा Tata Motors, Maruti Suzuki और Mahindra जैसी घरेलू कंपनियों को बड़े ऑर्डर के रूप में मिल सकता है।
ओला-उबर के लिए कितनी बड़ी चुनौती?
निजी टैक्सी कंपनियों के लिए भारत टैक्सी एक बड़ा सिरदर्द साबित हो सकती है। अगर ड्राइवरों को अपनी पूरी कमाई अपने पास रखने का मौका मिलेगा, तो वे निजी प्लेटफॉर्म छोड़कर सरकारी ऐप से जुड़ना पसंद करेंगे। वहीं, सरकारी निगरानी की वजह से किराया भी स्थिर रहेगा, जिससे ‘पीक ऑवर्स’ के नाम पर होने वाली लूट बंद हो सकती है।
6 जून 2025 को रजिस्टर्ड हुई इस कोऑपरेटिव संस्था के जरिए सरकार पूरे देश के ट्रांसपोर्ट सिस्टम को एक नया रूप देने की ओर बढ़ रही है। अब बस इंतजार है 1 जनवरी 2026 का, जब यह सर्विस सड़कों पर उतरेगी।
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