भारत और बांग्लादेश के बीच बढ़ते राजनयिक तनाव और वहां जारी हिंसक प्रदर्शनों का सीधा असर अब व्यापार और पर्यटन पर दिखने लगा है। ताजा घटनाक्रम में, बांग्लादेश ने नई दिल्ली स्थित अपने हाई कमीशन में भारतीयों के लिए वीजा और कांसुलर सेवाओं को अनिश्चित काल के लिए सस्पेंड (Suspend) कर दिया है। सिर्फ दिल्ली ही नहीं, बल्कि त्रिपुरा के असिस्टेंट हाई कमीशन और पश्चिम बंगाल में निजी ऑपरेटर्स के जरिए दी जाने वाली वीजा सेवाओं पर भी ताला लग गया है।
इस तालाबंदी का सबसे बड़ा शिकार बना है भारत का मेडिकल टूरिज्म (Medical Tourism)। हर साल लाखों की संख्या में बांग्लादेशी नागरिक बेहतर इलाज की उम्मीद में भारत आते हैं, लेकिन अब वीजा सेवाओं के ठप होने से यह सिलसिला पूरी तरह थमने की कगार पर है।
आंकड़े दे रहे हैं गवाही: भारत के लिए क्यों जरूरी है बांग्लादेश?
भारत में इलाज कराने आने वाले विदेशी मरीजों की सूची में बांग्लादेश हमेशा से पहले पायदान पर रहा है। सरकारी आंकड़े बताते हैं कि पिछले चार सालों में भारत का मेडिकल टूरिज्म जिस रफ्तार से बढ़ा है, उसमें सबसे बड़ा हाथ हमारे पड़ोसी मुल्क का ही है।
| साल | कुल मेडिकल टूरिस्ट (भारत में) | बांग्लादेशी मरीजों की संख्या |
| 2020 | 1,82,000+ | 99,155 |
| 2024 | 6,44,000+ | 4,82,336 |
इन आंकड़ों से साफ है कि भारत आने वाले हर 4 में से लगभग 3 मेडिकल टूरिस्ट बांग्लादेशी होते हैं। इराक, सोमालिया, ओमान और उज्बेकिस्तान जैसे देशों से भी मरीज भारत आते हैं, लेकिन बांग्लादेश की तुलना में उनकी संख्या बेहद कम है।
क्यों लगा वीजा सेवाओं पर ब्रेक?
बांग्लादेश में छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद भड़की हिंसा ने वहां की कानून-व्यवस्था को हिला कर रख दिया है। इस आंतरिक अशांति के बीच भारत के साथ डिप्लोमैटिक रिश्तों में आई तल्खी ने आग में घी का काम किया। सुरक्षा कारणों और प्रशासनिक चुनौतियों का हवाला देते हुए बांग्लादेशी दूतावासों ने वीजा सेवाओं को बंद कर दिया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो भारत के निजी अस्पतालों, विशेष रूप से कोलकाता, दिल्ली और चेन्नई के बड़े हॉस्पिटल्स को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
मरीजों के लिए बढ़ी मुसीबत
कैंसर, हृदय रोग और अंग प्रत्यारोपण (Transplant) जैसे गंभीर इलाज के लिए बांग्लादेशी नागरिक भारतीय डॉक्टरों पर सबसे ज्यादा भरोसा करते हैं। वीजा सस्पेंड होने का मतलब है कि जो मरीज इलाज के बीच में हैं या जिन्हें तुरंत सर्जरी की जरूरत है, उनकी जान पर जोखिम बढ़ गया है। साथ ही, पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा जैसे राज्यों में जो छोटे होटल और गेस्ट हाउस इन मरीजों के भरोसे चलते हैं, उनका कारोबार भी पूरी तरह ठप हो गया है।
भारत सरकार और विदेश मंत्रालय इस स्थिति पर बारीकी से नजर रखे हुए है, लेकिन जब तक पड़ोसी मुल्क में शांति बहाल नहीं होती, तब तक मेडिकल टूरिज्म की यह ‘लाइफलाइन’ संकट में ही रहेगी।
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