संसद के शीतकालीन सत्र में मोदी सरकार ने एक ऐसा कदम उठाया है जिसने देश के सियासी गलियारों और अर्थशास्त्रियों के बीच खलबली मचा दी है। सरकार ने ‘विकसित भारत गारंटी फॉर रोज़गार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ यानी ‘वीबी-जी राम जी’ (VB-G RAM JI) विधेयक को पास कर दिया है।
दावा है कि यह बिल ग्रामीण भारत की तस्वीर बदल देगा, लेकिन विपक्ष और कई विशेषज्ञ इसे मनरेगा (MGNREGA) के खात्मे की शुरुआत मान रहे हैं। इसी मुद्दे पर मशहूर अर्थशास्त्री और मनरेगा के ड्राफ्ट को तैयार करने में अहम भूमिका निभाने वाले ज्यां द्रेज़ ने अपनी गंभीर चिंताएं जाहिर की हैं।
क्या है नया ‘वीबी-जी राम जी’ बिल?
सरकार का तर्क है कि ‘वीबी-जी राम जी’ बिल मनरेगा का एक आधुनिक और बेहतर रूप है। इसके तहत ग्रामीण इलाकों में न केवल रोजगार मिलेगा, बल्कि कौशल विकास और स्थायी आजीविका पर भी जोर दिया जाएगा। सरकार का कहना है कि पुराने ढर्रे को बदलकर अब “काम के बदले अनाज” या “मजदूरी” से आगे बढ़कर लोगों को आत्मनिर्भर बनाने की तैयारी है।
ज्यां द्रेज़ की बड़ी चिंताएं: “हक की जगह अब सिर्फ योजना?”
बीबीसी संवाददाता इक़बाल अहमद से बातचीत में ज्यां द्रेज़ ने इस बिल की बारीकियों पर सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि मनरेगा एक ‘कानूनी अधिकार’ (Right to Work) था। अगर सरकार काम नहीं देती थी, तो उसे बेरोजगारी भत्ता देना पड़ता था। लेकिन नए बिल के ढांचे को देखकर लगता है कि यह अधिकारों से ज्यादा एक ‘सरकारी मिशन’ बनकर रह जाएगा।
द्रेज़ की चिंताओं के 3 मुख्य बिंदु:
बजट में कटौती का डर: द्रेज़ का मानना है कि नए नाम और ढांचे के पीछे असल मकसद बजट को सीमित करना हो सकता है। मनरेगा में मांग के आधार पर फंड मिलता था, लेकिन नए मिशन में फंड की सीमा तय की जा सकती है।
जवाबदेही का अभाव: पुराने कानून में पारदर्शिता और सोशल ऑडिट का प्रावधान कड़ा था। नए बिल में ये प्रक्रियाएं कितनी प्रभावी होंगी, इस पर संशय है।
रोजगार की गारंटी पर खतरा: द्रेज़ कहते हैं कि अगर यह बिल मनरेगा को पूरी तरह रिप्लेस करता है, तो गरीब मजदूरों के पास काम मांगने का कानूनी अधिकार छिन सकता है।
विपक्ष का हल्लाबोल और सरकार की सफाई
जहाँ एक तरफ राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं ने इसे “गरीबों के पेट पर लात” करार दिया है, वहीं सरकार के मंत्रियों का कहना है कि यह बिल ग्रामीणों को मजदूरी के दलदल से निकालकर सम्मानजनक आजीविका की ओर ले जाएगा। सरकार का दावा है कि इससे ग्रामीण इलाकों में इन्फ्रास्ट्रक्चर बेहतर होगा और भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी।
आगे क्या होगा?
ज्यां द्रेज़ जैसे जानकारों का मानना है कि भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था अभी भी संकट में है। ऐसे में किसी भी नए प्रयोग से पहले यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि जो सुरक्षा कवच (Safety Net) मनरेगा ने गरीबों को दिया था, वह कमजोर न पड़ जाए।
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