भारतीय राजनीति में नेहरू और बाबरी मस्जिद को लेकर चल रही पुरानी बहस एक बार फिर गरमा गई है। बीजेपी ने बुधवार को सरदार वल्लभभाई पटेल की बेटी मणिबेन पटेल की किताब का हवाला देकर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के हालिया दावों को दोहराया। पार्टी का कहना है कि भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने सरकारी धन से बाबरी मस्जिद बनवाने की बात उठाई थी, लेकिन सरदार पटेल ने इसे अस्वीकार कर दिया था।
कांग्रेस ने इस आरोप को सिरे से खारिज करते हुए इसे “झूठ” और “व्हाट्सऐप यूनिवर्सिटी की कहानी” बताया है। कांग्रेस का कहना है कि राजनाथ सिंह को इस तरह के दावों से बचना चाहिए और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरह बयानबाजी की राजनीति में नहीं उतरना चाहिए।
राजनाथ सिंह का दावा—सरकारी पैसों से बाबरी मस्जिद?
मंगलवार को राजनाथ सिंह ने कहा था कि नेहरू सार्वजनिक धन का इस्तेमाल बाबरी मस्जिद के निर्माण में करना चाहते थे, लेकिन सरदार पटेल ने उनका यह प्रस्ताव रोक दिया। यह बयान आते ही राजनीतिक हलकों में खलबली मच गई।
बीजेपी नेता और राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस दावे के पीछे का “सोर्स” भी सामने रखा। उन्होंने कहा कि राजनाथ सिंह जिस घटना का जिक्र कर रहे थे, उसका आधार “इनसाइड स्टोरी ऑफ सरदार पटेल: डायरी ऑफ मणिबेन पटेल” है। उनके मुताबिक, इस पुस्तक के पृष्ठ 24 में साफ लिखा है कि नेहरू ने बाबरी मस्जिद के निर्माण का मुद्दा उठाया था, लेकिन पटेल ने स्पष्ट कहा कि सरकारी धन इसमें खर्च नहीं किया जा सकता।
त्रिवेदी ने किताब का अंश पढ़ते हुए बताया कि पटेल ने नेहरू से कहा कि सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण की प्रक्रिया बिल्कुल अलग है क्योंकि इसे एक न्यास द्वारा संचालित किया जा रहा है और इसके लिए करीब 30 लाख रुपये चंदे से इकट्ठे किए गए हैं। उन्होंने कहा कि मुंशी सिर्फ एक सदस्य हैं और जाम साहब इस न्यास के अध्यक्ष हैं, इसलिए इसमें सरकारी धन शामिल नहीं है। यह सुनकर नेहरू चुप हो गए।
कांग्रेस पर BJP का पलटवार
त्रिवेदी ने कांग्रेस नेताओं की आलोचना करते हुए कहा कि पार्टी को अपने प्रवक्ताओं को बयान देने से पहले “अच्छे से सोच-विचार कराना चाहिए।” उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस इतिहास को अपनी सुविधा के हिसाब से याद करती है, जबकि तथ्य स्पष्ट रूप से मौजूद हैं।
बीजेपी नेता ने यह भी आरोप लगाया कि उस समय कांग्रेस सरकार ने राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद को सोमनाथ मंदिर के उद्घाटन समारोह में शामिल होने से रोकने की कोशिश की थी। इसके बावजूद वे समारोह में पहुंचे थे।
इसके बाद दूसरी किताब “Selected Works of Jawaharlal Nehru Series–2” का जिक्र करते हुए त्रिवेदी ने आरोप लगाया कि नेहरू ने जाम साहब को भी इस समारोह में न जाने का सुझाव दिया था।
नेहरू के मंदिरों पर टिप्पणी भी विवाद में
त्रिवेदी ने दावा किया कि नेहरू ने 1959 में दिल्ली के एक कार्यक्रम में कहा था कि दक्षिण भारत के कुछ मंदिर—हालांकि बेहद खूबसूरत—उन्हें ‘अरुचिकर’ लगते हैं। उन्होंने उनके कथित शब्द पढ़कर सुनाए:
“दक्षिण के कुछ मंदिर अपनी सुंदरता के बावजूद मुझे अरुचिकर लगते हैं। मैं नहीं जानता ऐसा क्यों है, पर वे दमनकारी लगते हैं, मेरी आत्मा को दबाते हैं। मुझे धूप और हवा पसंद है।”
बीजेपी नेता ने कहा कि इसके विपरीत नेहरू ताजमहल को “अद्भुत रूप से सुंदर” बताया करते थे।
उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि “हम इतिहास नहीं खंगाल रहे, लेकिन कांग्रेस को अपने ‘राजनीतिक डीएनए’ की जांच करानी चाहिए।”
त्रिवेदी ने अंत में एक फिल्मी गीत का मजाकिया संदर्भ देते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस की राजनीति हमेशा “हिंदू विरोध” के इर्द-गिर्द घूमती रही है।
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