बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों से पहले ही एग्जिट पोल्स पर सियासत गरमा गई है। समाजवादी पार्टी (SP) अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बीजेपी पर बड़ा हमला बोलते हुए कहा कि “ये सब पहले से प्लान किया गया फेक एग्जिट पोल गेम है।” उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी इन नकली सर्वे के ज़रिए जनता को गुमराह कर रही है ताकि असली नतीजों से पहले ही जीत का माहौल बनाया जा सके।
अखिलेश यादव ने कहा कि उन्होंने पहले भी देखा है कि कैसे कुछ मीडिया चैनल्स वोटिंग खत्म होते ही महज कुछ घंटों में पूरे एग्जिट पोल डेटा जारी कर देते हैं। उन्होंने सवाल उठाया, “जब चुनाव आयोग को खुद नतीजों की पूरी प्रक्रिया में कई दिन लगते हैं, तो ये चैनल्स इतनी जल्दी इतने विस्तृत आंकड़े कहां से लाते हैं?”
पूर्व मुख्यमंत्री ने दावा किया कि ये सब “पहले से तय स्क्रिप्ट” का हिस्सा है, जो बीजेपी के आईटी सेल और उसके सहयोगी चैनल्स के जरिए चलाया जा रहा है। अखिलेश ने कहा कि “ऐसे ही फेक एग्जिट पोल्स उत्तर प्रदेश लोकसभा चुनाव के दौरान भी दिखाए गए थे, जिनमें कहा गया था कि बीजेपी भारी जीत दर्ज करेगी, लेकिन नतीजे आने के बाद कई बड़े बीजेपी नेता हार गए थे।”
उन्होंने आगे कहा कि “BJP का पूरा खेल जनता की सोच को प्रभावित करने का है। उन्हें पता है कि ग्राउंड पर जनता उनसे खुश नहीं है, इसलिए अब ‘एग्जिट पोल’ का सहारा लिया जा रहा है।” अखिलेश यादव ने दावा किया कि जब असली नतीजे सामने आएंगे, तो “सच्चाई सबके सामने होगी और जनता इन झूठे सर्वे करने वालों को जवाब देगी।”
अखिलेश ने यह भी कहा कि एग्जिट पोल्स को लेकर नियम और पारदर्शिता की कमी है। “जब तक चुनाव आयोग इन चैनलों की जवाबदेही तय नहीं करेगा, तब तक इस तरह की ‘फेक एग्जिट पोल पॉलिटिक्स’ चलती रहेगी,” उन्होंने कहा।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यूपी चुनावों के वक्त भी मीडिया के कई सर्वे ने बीजेपी को क्लीन स्वीप बताया था, लेकिन नतीजे उलट निकले थे। “कई बड़े नेता हार गए और जनता ने बताया कि ‘एग्जिट पोल’ नहीं, ‘पब्लिक पोल’ ही असली होता है,” अखिलेश ने तंज कसा।
बीजेपी की तरफ से अब तक अखिलेश यादव के इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। वहीं, राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि एग्जिट पोल्स सिर्फ अनुमान होते हैं, लेकिन उनके ज़रिए जनता की धारणा पर असर ज़रूर पड़ता है।
बिहार में इस बार का चुनाव बेहद दिलचस्प हो गया है। जहां एग्जिट पोल्स NDA को बढ़त दिखा रहे हैं, वहीं विपक्षी दलों का दावा है कि “ग्राउंड रियलिटी” कुछ और कहती है। अखिलेश यादव जैसे नेताओं के बयान से स्पष्ट है कि आने वाले दिनों में एग्जिट पोल्स की विश्वसनीयता पर बहस और तेज़ होने वाली है।
अस्वीकरण: इस लेख में दी गई जानकारी इंटरनेट पर उपलब्ध सार्वजनिक स्रोतों से एकत्रित की गई है। पाठकों से अनुरोध है कि वे इस जानकारी को उपलब्ध स्रोतों से सत्यापित करें।








