Current date 19/03/2026

यूक्रेन जंग के बीच रूस संग युद्धाभ्यास में क्यों शामिल हुई इंडियन आर्मी? NATO में मची खलबली

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यूक्रेन जंग के बीच रूस संग युद्धाभ्यास में क्यों शामिल हुई इंडियन आर्मी? NATO में मची खलबली
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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। यूक्रेन और रूस के बीच जारी जंग के बीच भारत ने एक ऐसा कदम उठाया है जिसने पश्चिमी देशों की चिंता बढ़ा दी है। भारतीय सेना ने रूस और बेलारूस के साथ मिलकर बड़े पैमाने पर होने वाले युद्धाभ्यास जापद 2025 में हिस्सा लिया है। इस अभ्यास में भारत की मौजूदगी ने नाटो (NATO) देशों को चौकन्ना कर दिया है, क्योंकि यह कदम भारत और रूस के बीच लंबे समय से चले आ रहे सैन्य रिश्तों को और गहरा करता है।

जापद 2025: यूरोप को संदेश या भारत-रूस की मजबूती?

विशेषज्ञों का मानना है कि रूस और बेलारूस का यह युद्धाभ्यास सिर्फ सैन्य शक्ति दिखाने के लिए नहीं बल्कि यूरोप को डराने का संदेश देने के लिए भी है। भारत का इसमें शामिल होना साफ इशारा करता है कि उसके लिए रूस अब भी रणनीतिक साझेदार है।

भारत के रक्षा संबंध लंबे समय से रूस पर आधारित रहे हैं, क्योंकि भारतीय सेना का बड़ा हिस्सा आज भी रूसी तकनीक और हथियारों का इस्तेमाल करता है। हालांकि, सरकार “आत्मनिर्भर भारत” के तहत इस निर्भरता को कम करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

NATO में बेचैनी क्यों?

भारत के इस कदम से नाटो देशों की बेचैनी बढ़ गई है। यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काजा कल्लास ने इस पर चिंता जताते हुए कहा कि भारत और यूरोप के बीच रिश्ते सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय नियम-आधारित व्यवस्था और सैन्य सहयोग पर भी असर डालते हैं।

उन्होंने साफ कहा कि जब भारत रूस से तेल खरीदता है या ऐसे सैन्य अभ्यासों में शामिल होता है तो यह हमारे सहयोग के रास्ते में बाधा बनता है। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि भारत पूरी तरह से रूस से अलग नहीं हो सकता और दोनों पक्षों (भारत और यूरोप) को अपने मतभेदों पर बातचीत करनी होगी।

अमेरिका की निगाहें भी रूस-भारत के अभ्यास पर

अमेरिका ने भी इस पूरे घटनाक्रम पर बारीकी से नजर रखी। अमेरिकी रक्षा विभाग ने पुष्टि की है कि उसने जापद 2025 युद्धाभ्यास की निगरानी के लिए अपने सैन्य प्रतिनिधि भेजे हैं। यह कदम इसलिए भी अहम है क्योंकि रूस और बेलारूस का यह पहला संयुक्त युद्धाभ्यास है, जो 2022 में यूक्रेन पर रूसी हमले के बाद आयोजित हुआ है।

भारत-अमेरिका रिश्तों में नया मोड़

भारत का रूस के साथ इस तरह जुड़ना अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ उसके रिश्तों में एक नई स्थिति पैदा करता है। अमेरिका ने भारत पर टैरिफ के जरिए दबाव बनाने की कोशिश की है, लेकिन भारत ने अपने रुख में कोई ढील नहीं दी।

भारत सरकार ने अमेरिका की नाराजगी के बावजूद संतुलित नीति अपनाई है। उसने न तो अपने व्यापारिक रिश्ते बिगाड़े और न ही कूटनीतिक सहयोग से पीछे हटी। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत ने अमेरिका और डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन दोनों के साथ इस मुद्दे को काफी संतुलित तरीके से संभाला है।

क्यों अहम है भारत की मौजूदगी?

भारत का रूस के साथ इस युद्धाभ्यास में शामिल होना सिर्फ सैन्य रणनीति नहीं बल्कि एक भू-राजनीतिक संदेश भी है। यह भारत की “बहु-ध्रुवीय विदेश नीति” को दिखाता है, जिसमें वह न तो पूरी तरह अमेरिका के साथ खड़ा है और न ही रूस से दूर जा रहा है।

भारत ने रूस से सस्ते तेल खरीदकर अरबों डॉलर बचाए हैं, वहीं पश्चिमी देशों के साथ अपने रिश्ते भी बनाए रखे हैं। यही वजह है कि भारत की विदेश नीति आज दुनिया के लिए पहेली भी है और आकर्षण का केंद्र भी।

अस्वीकरण: इस लेख में दी गई जानकारी इंटरनेट पर उपलब्ध सार्वजनिक स्रोतों से एकत्रित की गई है। पाठकों से अनुरोध है कि वे इस जानकारी को उपलब्ध स्रोतों से सत्यापित करें।

लेखक

  • Nalini Mishra

    नलिनी मिश्रा: डिजिटल सामग्री प्रबंधन में विशेषज्ञता

    नलिनी मिश्रा डिजिटल सामग्री प्रबंधन की एक अनुभवी पेशेवर हैं। वह डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में कुशलतापूर्वक काम करती हैं और कंटेंट स्ट्रैटेजी, क्रिएशन, और प्रबंधन में विशेषज्ञता रखती हैं

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नलिनी मिश्रा

नलिनी मिश्रा: डिजिटल सामग्री प्रबंधन में विशेषज्ञतानलिनी मिश्रा डिजिटल सामग्री प्रबंधन की एक अनुभवी पेशेवर हैं। वह डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में कुशलतापूर्वक काम करती हैं और कंटेंट स्ट्रैटेजी, क्रिएशन, और प्रबंधन में विशेषज्ञता रखती हैं

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