मुंबई: मराठा समाज के लिए आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे मनोज जरांगे पाटील को आखिरकार मुंबई पुलिस ने आझाद मैदान में आंदोलन और उपवास करने की मंजूरी दे दी है।
लेकिन यह मंजूरी बिल्कुल बिना शर्त नहीं मिली—बल्कि पुलिस ने इसके लिए 8 कड़े नियम लागू किए हैं।
अगर शर्तें तोड़ीं तो कार्रवाई तय
मुंबई पुलिस ने साफ कहा है कि जरांगे या उनके समर्थकों ने अगर इन शर्तों का उल्लंघन किया तो आंदोलन को ग़ैर-क़ानूनी घोषित कर दिया जाएगा और तुरंत कार्रवाई की जाएगी।
हाईकोर्ट ने भी 26 अगस्त को दिए आदेश में सरकार और पुलिस को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि आंदोलन से स्थानीय लोगों और ट्रैफिक को परेशानी न हो। इसी आधार पर जरांगे को अब कंडीशनल परमिशन दी गई है।
आंदोलन की 8 शर्तें

आंदोलन की इजाज़त सिर्फ़ एक दिन के लिए होगी। शनिवार, रविवार और सरकारी छुट्टियों पर कोई परमिशन नहीं।
आंदोलनकारियों के वाहनों पर रोक—मुख्य स्थल तक सिर्फ़ 5 गाड़ियां जाएंगी, बाकी को शिवडी और कॉटनग्रीन में पार्क करना होगा।
आंदोलन के लिए 7000 स्क्वेयर मीटर जगह तय की गई है, जहां ज़्यादा से ज़्यादा 5000 लोग रह सकते हैं।
मोर्चा निकालने पर पूरी तरह पाबंदी।
बिना अनुमति लाउडस्पीकर या प्रचार सामग्री का इस्तेमाल नहीं होगा।
आंदोलन का समय सुबह 9 से शाम 6 बजे तक तय। रात में ठहरने की मनाही।
मैदान में खाना बनाने या कचरा फैलाने पर सख्त रोक।
गणेश विसर्जन या धार्मिक आयोजनों में बाधा न डाली जाए। साथ ही बच्चों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को आंदोलन में शामिल न करने की हिदायत।
गणेशोत्सव की वजह से पहले लगी थी रोक
दरअसल, गणेशोत्सव के चलते सरकार और हाईकोर्ट आंदोलन को टालना चाहते थे। हाईकोर्ट ने भी कहा था कि जरांगे को आझाद मैदान में प्रदर्शन की इजाज़त नहीं दी जा सकती। लेकिन जरांगे अपने फैसले पर अड़े रहे।
जरांगे का कहना है—
“हम कोर्ट का सम्मान करते हैं, लेकिन सरकार मुद्दे से ध्यान हटाने के लिए भगवान को बीच में ला रही है। चाहे जितनी भी अड़चनें आएं, हम नियमों का पालन करके आंदोलन करेंगे।”
वो अंतरवाली सराटी से अपनी यात्रा शुरू कर चुके हैं और साफ कह चुके हैं कि आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक मराठा समाज को आरक्षण नहीं मिलता।
अस्वीकरण: इस लेख में दी गई जानकारी इंटरनेट पर उपलब्ध सार्वजनिक स्रोतों से एकत्रित की गई है। पाठकों से अनुरोध है कि वे इस जानकारी को उपलब्ध स्रोतों से सत्यापित करें।








