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गर्मी की छुट्टियां: माउंट आबू, रेगिस्तान में ठंडा स्वर्ग

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गर्मी की छुट्टियां: माउंट आबू, रेगिस्तान में ठंडा स्वर्ग
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राजस्थान की तपती गर्मियों में जब रेगिस्तान की रेत सूरज की किरणों से जलने लगती है, तब एक ऐसी जगह है जो आपको प्राकृतिक सौंदर्य और ठंडी हवाओं का अहसास कराती है। जी हां, हम बात कर रहे हैं राजस्थान के एकमात्र हिल स्टेशन माउंट आबू की। अरावली पर्वतमाला की गोद में बसा यह खूबसूरत स्थान गर्मियों में परिवार के साथ छुट्टियां बिताने के लिए सबसे उत्तम विकल्प है। समुद्र तल से 1,722 मीटर की ऊंचाई पर स्थित माउंट आबू अपने मनमोहक दृश्यों, शांत झीलों, हरे-भरे जंगलों और ऐतिहासिक महत्व के स्थलों के लिए प्रसिद्ध है।

मैंने पिछले साल अपने परिवार के साथ माउंट आबू की यात्रा की थी और वह अनुभव अब तक मेरी यादों में ताजा है। जब हम जयपुर से सड़क मार्ग से माउंट आबू की ओर बढ़ रहे थे, तब राजस्थान के रेगिस्तानी इलाके से गुजरते हुए अचानक पहाड़ियों का आना और तापमान में आई गिरावट एक अद्भुत अनुभव था। जैसे-जैसे हम ऊपर की ओर बढ़े, हमें घने पेड़ों, टेढ़े-मेढ़े रास्ते और प्राकृतिक सौंदर्य का अहसास होने लगा।

माउंट आबू का इतिहास पौराणिक काल से जुड़ा हुआ है। प्राचीन काल में इसे “अर्बुदारण्य” या “अर्बुदा का वन” के नाम से जाना जाता था। कहा जाता है कि महर्षि वशिष्ठ ने महर्षि विश्वामित्र के साथ विवाद के बाद यहां शरण ली थी। एक अन्य किंवदंती के अनुसार, अर्बुदा नामक एक सर्प ने यहां भगवान शिव के वाहन नंदी की जान बचाई थी, जिसके बाद इस स्थान का नाम अर्बुदा पड़ा और कालांतर में यह माउंट आबू के रूप में प्रसिद्ध हुआ।

गर्मियों में माउंट आबू की यात्रा का सबसे बड़ा आकर्षण यहां का सुहावना मौसम है। जब राजस्थान के अन्य हिस्सों में तापमान 40-45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है, तब माउंट आबू में यह 20-30 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है। यह तापमान न तो बहुत अधिक गर्म होता है और न ही बहुत ठंडा, बल्कि आरामदायक होता है जो परिवार के साथ घूमने-फिरने के लिए एकदम सही है।

माउंट आबू की यात्रा करने वाले पर्यटकों के लिए नक्की झील एक प्रमुख आकर्षण है। इस झील के बारे में कहा जाता है कि इसे देवताओं ने अपने नाखूनों से खोदकर बनाया था, जिसके कारण इसका नाम नक्की झील पड़ा। यह भारत की पहली मानव निर्मित झील मानी जाती है। नक्की झील की सुंदरता का आनंद लेने के लिए आप बोट राइड का मजा ले सकते हैं या फिर झील के किनारे बैठकर सूरज के डूबने का नजारा देख सकते हैं। झील के आसपास के अजीबोगरीब आकार की चट्टानें भी पर्यटकों को आकर्षित करती हैं, जिनमें से सबसे प्रसिद्ध टोड रॉक है, जो एक मेंढक के आकार की विशाल चट्टान है।

माउंट आबू के पर्यटन स्थलों में गुरु शिखर का विशेष महत्व है। यह अरावली पर्वतमाला का सबसे ऊंचा बिंदु है, जहां से आप चारों ओर के मनोरम दृश्यों का आनंद ले सकते हैं। गुरु शिखर पर गुरु दत्तात्रेय का मंदिर है, जो ब्रह्मा, विष्णु और शिव के अवतार माने जाते हैं। इस मंदिर तक पहुंचने के लिए आपको लगभग 300 सीढ़ियां चढ़नी होंगी, लेकिन ऊपर पहुंचकर जो नजारा आपको देखने को मिलेगा, वह इस प्रयास को पूरी तरह से सार्थक कर देगा।

माउंट आबू का सबसे प्रसिद्ध आकर्षण दिलवाड़ा जैन मंदिर हैं, जो अपनी उत्कृष्ट वास्तुकला और संगमरमर पर की गई बारीक नक्काशी के लिए विश्व प्रसिद्ध हैं। 11वीं से 13वीं शताब्दी के बीच निर्मित ये मंदिर जैन धर्म के तीर्थंकरों को समर्पित हैं। इन मंदिरों में विमल वसही मंदिर, लूण वसही मंदिर, पित्तलहार मंदिर, परश्वनाथ मंदिर और महावीर स्वामी मंदिर शामिल हैं। इन मंदिरों की छतों, खंभों, दरवाजों और दीवारों पर की गई बारीक नक्काशी देखते ही बनती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन मंदिरों की वास्तुकला और कला आज भी दुनिया के अन्य किसी भी मंदिर में नहीं देखी जा सकती।

सनसेट पॉइंट, जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, सूर्यास्त का मनोरम दृश्य देखने के लिए प्रसिद्ध है। यहां से आप सूरज के डूबने का अद्भुत नजारा देख सकते हैं, जब सूरज की सुनहरी किरणें पहाड़ियों और झीलों पर पड़ती हैं और एक अविस्मरणीय दृश्य उत्पन्न करती हैं। अगर आप अपने प्रियजन के साथ कुछ रोमांटिक पल बिताना चाहते हैं, तो हनीमून पॉइंट एक बेहतरीन जगह है, जहां से आप चारों ओर की पहाड़ियों के मनोहारी दृश्य का आनंद ले सकते हैं।

माउंट आबू वन्यजीव अभयारण्य प्रकृति प्रेमियों के लिए एक स्वर्ग है। 288 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला यह अभयारण्य विभिन्न प्रकार के पेड़-पौधों और जीव-जंतुओं का घर है। यहां आप तेंदुए, जंगली सूअर, सांभर, लंगूर और कई प्रकार के पक्षियों को देख सकते हैं। अगर आप पक्षियों को देखने के शौकीन हैं, तो ट्रेवर्स टैंक आपके लिए एक आदर्श स्थान है, जहां आप शांतिपूर्ण वातावरण में पक्षियों का अवलोकन कर सकते हैं।

अचलगढ़ का किला 14वीं शताब्दी में मेवाड़ के महाराणा कुंभा द्वारा बनवाया गया था और अपने ऐतिहासिक महत्व और सुंदर वास्तुकला के कारण एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल है। किले के अंदर अचलेश्वर महादेव का मंदिर है, जहां शिवजी के पैर के अंगूठे का निशान है। किले से कुछ ही दूरी पर अर्धनारीश्वर मंदिर है, जो शिव के अर्धनारीश्वर रूप को समर्पित है।

माउंट आबू में आध्यात्मिक पर्यटन का भी विशेष महत्व है। यहां ब्रह्मा कुमारी विश्व आध्यात्मिक विश्वविद्यालय का मुख्यालय है, जो आध्यात्मिक शिक्षा और ध्यान के लिए विश्व प्रसिद्ध है। यहां आप आध्यात्मिक सत्संग और ध्यान में भाग ले सकते हैं, जो आपके मन को शांति और सुकून प्रदान करेगा।

माउंट आबू अपने त्योहारों के लिए भी प्रसिद्ध है। हर साल बुद्ध पूर्णिमा के दिन से शुरू होने वाला समर फेस्टिवल राजस्थानी संस्कृति के उत्सव का प्रतीक है। इस त्योहार में लोक गायन, गैर, घूमर और दफ जैसे लोक नृत्य, क्ववाली सम्मेलन, घुड़दौड़, रस्साकशी, स्केटिंग रेस और नक्की झील पर नौका दौड़ जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। त्योहार का समापन आतिशबाजी के साथ होता है, जो पहाड़ियों और झीलों के पृष्ठभूमि में एक अद्वितीय अनुभव प्रदान करता है।

माउंट आबू में ठहरने के लिए विभिन्न प्रकार के आवास उपलब्ध हैं, जो बजट होटलों से लेकर लक्जरी रिसॉर्ट्स तक हैं। राजस्थान पर्यटन विभाग द्वारा संचालित होटल शिखर, एमपीटी होटल और कई निजी होटल और रिसॉर्ट्स यहां के प्रमुख आवास विकल्प हैं। अगर आप प्रकृति के बीच रहना चाहते हैं, तो वन विभाग द्वारा संचालित फॉरेस्ट लॉज में रह सकते हैं।

माउंट आबू की यात्रा का सबसे अच्छा समय नवंबर से फरवरी के बीच है, जो राजस्थान में सर्दियों का मौसम होता है। इस दौरान मौसम सुहावना और ठंडा रहता है, तापमान 12°C से 29°C के बीच रहता है। यह माउंट आबू के विभिन्न पर्यटन स्थलों की खोज करने, प्रकृति की सैर करने और बाहरी गतिविधियों में शामिल होने का सही समय है। मानसून का मौसम, जुलाई से सितंबर तक, भी माउंट आबू की यात्रा के लिए अच्छा समय है क्योंकि इस दौरान प्राकृतिक परिदृश्य हरा-भरा हो जाता है और मौसम ठंडा हो जाता है। हालांकि, गर्मियों के मौसम में भी माउंट आबू राजस्थान के अन्य हिस्सों की तुलना में काफी ठंडा रहता है, इसलिए गर्मियों में छुट्टियां बिताने के लिए यह एक आदर्श स्थान है।

माउंट आबू की यात्रा के दौरान आप स्थानीय व्यंजनों का भी आनंद ले सकते हैं। यहां के रेस्तरां और होटल राजस्थानी, गुजराती और उत्तर भारतीय व्यंजनों की विविधता प्रदान करते हैं। दाल बाटी चूरमा, गट्टे की सब्जी, कैर संगरी, लाल मांस और बाजरे की रोटी जैसे राजस्थानी व्यंजन यहां के प्रमुख आकर्षण हैं। इसके अलावा, स्थानीय बाजारों में आप राजस्थानी हस्तशिल्प, ज्वेलरी, कपड़े और अन्य सजावटी सामान खरीद सकते हैं।

माउंट आबू तक पहुंचने के लिए कई विकल्प हैं। निकटतम हवाई अड्डा उदयपुर है, जो माउंट आबू से लगभग 175 किलोमीटर दूर है। अबू रोड रेलवे स्टेशन माउंट आबू से केवल 28 किलोमीटर दूर है और यह देश के प्रमुख शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। इसके अलावा, राजस्थान राज्य सड़क परिवहन निगम और कई निजी बस सेवाएं राज्य के विभिन्न हिस्सों से माउंट आबू के लिए नियमित बस सेवाएं संचालित करती हैं।

माउंट आबू की यात्रा के दौरान कुछ चीजों का ध्यान रखना जरूरी है। पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण यहां सुबह और शाम के समय मौसम ठंडा हो सकता है, इसलिए अपने साथ गर्म कपड़े रखना न भूलें। यहां की यात्रा के दौरान आरामदायक फुटवियर पहनना चाहिए, क्योंकि आपको कई स्थानों पर पैदल चलना पड़ सकता है। साथ ही, अपने साथ पानी की बोतल, सनस्क्रीन, टोपी और चश्मे जैसी जरूरी चीजें रखें।

अंत में, मैं यह कहना चाहूंगी कि माउंट आबू राजस्थान की गर्मियों में छुट्टियां बिताने के लिए सबसे अच्छी जगह है। यह न केवल अपने सुहावने मौसम के लिए, बल्कि अपने प्राकृतिक सौंदर्य, ऐतिहासिक महत्व और आध्यात्मिक वातावरण के लिए भी प्रसिद्ध है। चाहे आप प्रकृति प्रेमी हों, इतिहास के शौकीन हों, आध्यात्मिक व्यक्ति हों या बस अपने परिवार के साथ कुछ गुणवत्तापूर्ण समय बिताना चाहते हों, माउंट आबू आपके लिए एक आदर्श गंतव्य है। तो इस गर्मी की छुट्टियों में माउंट आबू की यात्रा की योजना बनाएं और राजस्थान के इस स्वर्ग का आनंद लें।

लेखक

  • Nalini Mishra

    नलिनी मिश्रा: डिजिटल सामग्री प्रबंधन में विशेषज्ञता

    नलिनी मिश्रा डिजिटल सामग्री प्रबंधन की एक अनुभवी पेशेवर हैं। वह डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में कुशलतापूर्वक काम करती हैं और कंटेंट स्ट्रैटेजी, क्रिएशन, और प्रबंधन में विशेषज्ञता रखती हैं

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नलिनी मिश्रा

नलिनी मिश्रा: डिजिटल सामग्री प्रबंधन में विशेषज्ञतानलिनी मिश्रा डिजिटल सामग्री प्रबंधन की एक अनुभवी पेशेवर हैं। वह डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में कुशलतापूर्वक काम करती हैं और कंटेंट स्ट्रैटेजी, क्रिएशन, और प्रबंधन में विशेषज्ञता रखती हैं

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