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North Korea में TV देखना भी अपराध Hairstyle पर सरकार कि नजर

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North Korea में TV देखना भी अपराध Hairstyle पर सरकार कि नजर
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(North Korea) उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन के शासन में नागरिकों की स्वतंत्रता इतनी सीमित है कि वहां टीवी देखना भी एक अपराध माना जाता है। यह प्रतिबंध न केवल विदेशी चैनलों पर लागू होता है, बल्कि किसी भी अनधिकृत सामग्री को देखने पर कठोर दंड का प्रावधान है। देश से भागे हुए लोगों के खुलासे इस निरंकुश व्यवस्था की दास्तान बयान करते हैं, जो दर्शाता है कि कैसे मीडिया पर नियंत्रण एक व्यापक दमनकारी शासन का हिस्सा है।

सरकारी निगरानी का कठोर चेहरा

टिमोथी चो, जो उत्तर कोरिया से भाग चुके हैं, ने हाल ही में मीडिया को बताया कि वहां टीवी खरीदना और देखना एक जटिल और नियंत्रित प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि टीवी खरीदने के लिए विशेष अनुमति की आवश्यकता होती है। जब कोई व्यक्ति टीवी खरीदता है, तो सरकारी अधिकारी तुरंत उसके घर पहुंचते हैं और सभी एंटीना निकाल देते हैं। इसके अलावा, वे टीवी को सील कर देते हैं ताकि इसे केवल सरकारी चैनलों तक ही सीमित रखा जा सके।

केवल सरकारी प्रचार ही दिखाने की अनुमति

चो के अनुसार, नागरिक केवल एक ही एंटीना के माध्यम से किम परिवार से संबंधित कार्यक्रम देख सकते हैं। यह एंटीना सरकार द्वारा नियंत्रित और मॉनिटर किया जाता है। 24 घंटे केवल सरकारी प्रचार ही प्रसारित होता है, जिसमें किम परिवार की महिमा और देश की उपलब्धियों का बखान किया जाता है। किसी अन्य चैनल या कार्यक्रम को देखने की कोशिश करने पर गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं, जिसमें जेल की सजा या यहां तक कि मृत्युदंड भी शामिल हो सकता है। यह कठोर नियंत्रण सरकार की जानकारी पर एकाधिकार बनाए रखने की रणनीति का हिस्सा है।

व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर पूर्ण प्रतिबंध

बालों की कटाई से लेकर कपड़े पहनने तक, हर चीज पर सरकारी नियंत्रण है। यह नियंत्रण व्यक्तिगत पहचान और अभिव्यक्ति को दबाने का एक तरीका है। स्कूल जाने वाले बच्चों को केवल तीन निर्धारित हेयर स्टाइल में से एक चुनने की अनुमति होती है। ये स्टाइल सरकार द्वारा ‘उचित’ और ‘देशभक्त’ माने जाते हैं। इन नियमों के उल्लंघन पर माता-पिता को पुलिस स्टेशन बुलाया जाता है, जहां उन्हें चेतावनी दी जाती है और कभी-कभी दंडित भी किया जाता है। यह व्यवस्था बचपन से ही नागरिकों में अनुशासन और आज्ञाकारिता को बढ़ावा देती है।

देश छोड़ने की मजबूरी

1950 से अब तक लगभग 30,000 लोग ही इस दमनकारी शासन से बच पाए हैं। यह संख्या उत्तर कोरिया की कुल आबादी का एक छोटा सा हिस्सा है, जो दर्शाता है कि देश छोड़ना कितना कठिन और खतरनाक है। अधिकतर लोग दक्षिण कोरिया, चीन, यूरोप और अमेरिका में शरण लेते हैं। इन देशों में वे नए जीवन की शुरुआत करते हैं, लेकिन अक्सर भाषा और संस्कृति के अंतर से जूझते हैं। टिमोथी चो इन्हीं में से एक हैं, जो अब ब्रिटेन में मानवाधिकार कार्यकर्ता के रूप में काम कर रहे हैं। वे अपने अनुभवों का उपयोग उत्तर कोरिया में मानवाधिकारों की स्थिति पर प्रकाश डालने के लिए करते हैं।

एक बंद समाज की पीड़ा

उत्तर कोरिया दुनिया के सबसे निरंकुश देशों में से एक है, जहां नागरिकों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता लगभग नगण्य है। टीवी देखने से लेकर बाल कटवाने तक, हर गतिविधि पर सरकारी नियंत्रण है। यहां तक कि इंटरनेट का उपयोग भी अत्यंत सीमित और नियंत्रित है, जिससे लोगों को बाहरी दुनिया से कटा हुआ रखा जाता है। यात्रा करने की स्वतंत्रता भी नहीं है, और लोगों को अपने देश से बाहर जाने की अनुमति नहीं दी जाती। ऐसे कठोर नियमों के कारण वहां के लोग हमेशा दमन और भय के माहौल में जीते हैं, जो उनके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डालता है।

लेखक

  • Nalini Mishra

    नलिनी मिश्रा: डिजिटल सामग्री प्रबंधन में विशेषज्ञता

    नलिनी मिश्रा डिजिटल सामग्री प्रबंधन की एक अनुभवी पेशेवर हैं। वह डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में कुशलतापूर्वक काम करती हैं और कंटेंट स्ट्रैटेजी, क्रिएशन, और प्रबंधन में विशेषज्ञता रखती हैं

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नलिनी मिश्रा

नलिनी मिश्रा: डिजिटल सामग्री प्रबंधन में विशेषज्ञतानलिनी मिश्रा डिजिटल सामग्री प्रबंधन की एक अनुभवी पेशेवर हैं। वह डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में कुशलतापूर्वक काम करती हैं और कंटेंट स्ट्रैटेजी, क्रिएशन, और प्रबंधन में विशेषज्ञता रखती हैं

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