मौसम के मिजाज को लेकर एक बड़ी खबर सामने आ रही है। अमेरिकी एजेंसी ‘नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन’ (NOAA) ने अपनी ताजा अपडेट में चेतावनी दी है कि इस साल गर्मियों के दौरान ‘अल नीनो’ (El Niño) दस्तक दे सकता है। इतना ही नहीं, वैज्ञानिकों का मानना है कि साल के अंत तक यह ‘सुपर अल नीनो’ का रूप भी ले सकता है।
यह भी पढ़ें:Pi Day 2026: क्या है 3.14 का असली रहस्य? जानें क्यों आज पूरी दुनिया मना रही है गणित का सबसे बड़ा त्योहार
पिछले कुछ समय से हम ‘ला नीना’ (La Niña) के प्रभाव में थे, जिससे समुद्र का पानी ठंडा रहता है, लेकिन अब यह चरण खत्म हो रहा है। प्रशांत महासागर में पानी तेजी से गर्म होने लगा है, जिसका सीधा असर दुनिया भर के मौसम पर पड़ने वाला है।
क्या होता है अल नीनो और क्यों बढ़ रही है चिंता?
सरल भाषा में समझें तो अल नीनो एक प्राकृतिक घटना है, जब प्रशांत महासागर में भूमध्य रेखा के पास चलने वाली हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं। इसके कारण गर्म पानी पूर्व की ओर जमा होने लगता है। जब समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से 1.5°C ज्यादा हो जाता है, तो इसे ‘सुपर अल नीनो’ कहा जाता है।
यह भी पढ़ें:मुश्किल में फंसे बादशाह: गिरफ्तारी और पासपोर्ट जब्त करने के आदेश
NOAA के मुताबिक, जून से अगस्त के बीच अल नीनो विकसित होने की संभावना 62% तक बढ़ गई है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि अक्टूबर से दिसंबर के बीच ‘सुपर अल नीनो’ बनने की 3 में से 1 संभावना है। अगर ऐसा होता है, तो यह 2023-24 के बाद का सबसे शक्तिशाली अल नीनो साबित हो सकता है।
गर्मी और मानसून पर क्या होगा असर?
यह भी पढ़ें:अमेरिका में भारतीय मूल के दो भाइयों को 835 साल की सजा, 250 करोड़ से ज्यादा की ठगी और रसूख का ऐसा अंत
आमतौर पर अल नीनो का नाम आते ही लोगों के मन में भीषण गर्मी का डर बैठ जाता है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि गर्मियों के तापमान पर इसका सीधा और बहुत बड़ा बदलाव तुरंत नहीं दिखता, लेकिन इसके दूरगामी परिणाम गंभीर होते हैं।
मानसून में देरी: भारत जैसे कृषि प्रधान देश के लिए अल नीनो अच्छी खबर नहीं होती। यह अक्सर मानसून को कमजोर कर देता है, जिससे सूखे जैसी स्थिति पैदा हो सकती है।
चक्रवातों (Hurricanes) पर प्रभाव: दिलचस्प बात यह है कि अल नीनो अटलांटिक महासागर में उठने वाले तूफानों की रफ्तार को कम कर देता है। तेज हवाओं के कारण चक्रवात अपनी ताकत नहीं जुटा पाते, जिससे वहां समुद्री तूफानों की संख्या घट सकती है।
सर्दियों का बदलता मिजाज: अगर अल नीनो सर्दियों तक बना रहता है, तो यह दुनिया के कई हिस्सों में मौसम को पूरी तरह पलट देता है। कहीं भारी बारिश होती है, तो कहीं सामान्य से ज्यादा गर्मी पड़ती है।
पिछले 10 सालों का क्या रहा रिकॉर्ड?
पिछले एक दशक में हमने ज्यादातर ‘ला नीना’ या ‘न्यूट्रल’ फेज ही देखा है। 2017 के बाद 2018 की सर्दियों में अल नीनो आया था, जिसके बाद 2020 से 2023 तक हम लगातार ला नीना के साये में रहे। इसके बाद 2023 की गर्मियों से 2024 की सर्दियों तक अल नीनो का असर दिखा, जिसने मध्य-पश्चिम के इलाकों में रिकॉर्ड तोड़ गर्मी पैदा की थी। अब एक बार फिर मौसम चक्र उसी दिशा में मुड़ता दिख रहा है।
फिलहाल मौसम विभाग की टीमें इस पर पैनी नजर रख रही हैं। अल नीनो कितना ताकतवर होगा और यह कितने समय तक टिकेगा, इसकी सटीक जानकारी आने वाले कुछ महीनों में साफ हो जाएगी। लेकिन इतना तय है कि प्रकृति का यह बदलाव आने वाले दिनों में खेती से लेकर हमारी जीवनशैली तक को प्रभावित कर सकता है।
अस्वीकरण: इस लेख में दी गई जानकारी इंटरनेट पर उपलब्ध सार्वजनिक स्रोतों से एकत्रित की गई है। पाठकों से अनुरोध है कि वे इस जानकारी को उपलब्ध स्रोतों से सत्यापित करें।








