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राजपाल यादव को मिली बड़ी राहत! 10 दिन जेल में रहने के बाद हुए रिहा, लेकिन चुकानी पड़ी ये भारी कीमत

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राजपाल यादव को मिली बेल, चुकाए 1.5 करोड़ रुपये, जानें शर्तें
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बॉलीवुड के मशहूर कॉमेडियन और अपनी एक्टिंग से सबको हंसाने वाले राजपाल यादव के फैंस के लिए आज एक राहत भरी खबर आई है। पिछले 10 दिनों से तिहाड़ जेल की सलाखों के पीछे दिन गुजार रहे राजपाल यादव को आखिरकार जमानत मिल गई है। 9 करोड़ रुपये के चेक बाउंस मामले में फंसे अभिनेता को दिल्ली हाईकोर्ट ने आज, यानी 16 फरवरी 2026 को अंतरिम जमानत दे दी है। हालांकि, यह आजादी इतनी आसानी से नहीं मिली है; इसके लिए उन्हें कोर्ट में भारी-भरकम रकम जमा करनी पड़ी है और कई सख्त शर्तों का पालन भी करना होगा।

तुरंत जमा कराए डेढ़ करोड़, तब खुली जेल की ताला

सोमवार को इस हाई-प्रोफाइल मामले की सुनवाई के दौरान अदालत का माहौल काफी गंभीर था। पिछली सुनवाई 12 फरवरी को हुई थी, जहाँ केवल एक पक्ष को सुना गया था, लेकिन आज फैसला अभिनेता के पक्ष में रहा। दिल्ली हाईकोर्ट ने राजपाल यादव को स्पष्ट निर्देश दिया कि यदि उन्हें जमानत चाहिए, तो उन्हें शिकायतकर्ता के बैंक खाते में तुरंत 1.5 करोड़ रुपये जमा कराने होंगे।

अदालत का आदेश आते ही राजपाल यादव की लीगल टीम हरकत में आई। अभिनेता ने कोर्ट के आदेश का सम्मान करते हुए दोपहर 3 बजे से पहले ही 1.5 करोड़ रुपये की राशि ऑनलाइन ट्रांसफर कर दी। जैसे ही अदालत को पैसे जमा होने की पुष्टि मिली, उन्हें 18 मार्च तक के लिए अंतरिम जमानत दे दी गई। यह खबर उनके परिवार और फैंस के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं है, क्योंकि राजपाल की भतीजी की शादी 19 फरवरी को शाहजहांपुर में होने वाली है। अब वे इस पारिवारिक समारोह में शामिल हो सकेंगे।

पासपोर्ट जब्त और हाजिरी जरूरी: कोर्ट की सख्त शर्तें

भले ही राजपाल यादव को जेल से बाहर आने की इजाजत मिल गई हो, लेकिन कानूनी फंदा अभी भी उनके गले में है। जमानत देते वक्त हाई कोर्ट ने कुछ सख्त शर्तें भी रखी हैं:

  • पासपोर्ट सरेंडर: राजपाल यादव देश छोड़कर नहीं जा सकते। उन्हें अपना पासपोर्ट अदालत में जमा करना होगा।

  • कोर्ट में उपस्थिति: मामले की अगली सुनवाई 18 मार्च 2026 को तय की गई है। उस दिन राजपाल यादव को या तो खुद कोर्ट में मौजूद रहना होगा या फिर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हाजिरी लगानी होगी।

क्यों जाना पड़ा था जेल? क्या है 9 करोड़ का पूरा विवाद?

यह मामला आज का नहीं, बल्कि पिछले 16 सालों से चला आ रहा है। राजपाल यादव की मुसीबतों की शुरुआत साल 2010 में हुई थी, जब उन्होंने डायरेक्टर के तौर पर अपनी पहली फिल्म ‘अता पता लापता’ बनाने का सपना देखा था। इस फिल्म के निर्माण के लिए उन्होंने दिल्ली की कंपनी ‘मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड’ से करीब 5 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था।

फिल्म 2012 में रिलीज तो हुई, लेकिन बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह फ्लॉप साबित हुई। फिल्म के पिटने से राजपाल यादव को गहरा आर्थिक झटका लगा और वे समय पर कर्ज नहीं चुका पाए। बात तब बिगड़ी जब कर्ज चुकाने के लिए दिए गए चेक बाउंस हो गए। बताया जाता है कि शिकायतकर्ता को दिए गए कुल 7 चेक बाउंस हुए थे। समय के साथ ब्याज बढ़ता गया और यह रकम 5 करोड़ से बढ़कर 9 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।

पहले भी काट चुके हैं जेल की सजा

अदालत ने इस मामले में कई बार राजपाल यादव को चेतावनी दी थी। पैसे न चुकाने और कोर्ट के आदेशों की अनदेखी करने पर साल 2018 में भी उन्हें 3 महीने की जेल की सजा सुनाई गई थी। उस वक्त भी उन्हें तिहाड़ जेल जाना पड़ा था, जिसने फिल्म इंडस्ट्री को चौंका दिया था।

इस बार भी, आदेशों का पालन न होने पर कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया और उन्हें 6 फरवरी 2026 को सरेंडर करने का आदेश दिया। पिछले 10 दिनों से वे जेल में ही थे। निचली अदालतों ने उन्हें नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत दोषी ठहराया था। सेशन कोर्ट से लेकर हाई कोर्ट तक, राजपाल ने कई दरवाजा खटखटाए, लेकिन उन्हें ‘सीमित राहत’ ही मिल पा रही थी। फिलहाल, 1.5 करोड़ रुपये देने के बाद उन्हें थोड़ी सांस लेने की मोहलत जरूर मिली है, लेकिन 18 मार्च को होने वाली अगली सुनवाई यह तय करेगी कि उनकी यह राहत बरकरार रहेगी या फिर मुश्किलें दोबारा बढ़ेंगी।

अस्वीकरण: इस लेख में दी गई जानकारी इंटरनेट पर उपलब्ध सार्वजनिक स्रोतों से एकत्रित की गई है। पाठकों से अनुरोध है कि वे इस जानकारी को उपलब्ध स्रोतों से सत्यापित करें।

लेखक

  • Mayur Phatak

    मयूर फाटक : डिजिटल सामग्री प्रबंधन में विशेषज्ञता

    मयूर फाटक डिजिटल सामग्री प्रबंधन की एक अनुभवी पेशेवर हैं। वह डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में कुशलतापूर्वक काम करते हैं और कंटेंट स्ट्रैटेजी, क्रिएशन, और प्रबंधन में विशेषज्ञता रखते हैं|

     

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