अगर आप भी सोना खरीदने की योजना बना रहे हैं या इसमें निवेश करने की सोच रहे हैं, तो आपके लिए एक बड़ी खबर है। पिछले काफी समय से रॉकेट की रफ्तार से भाग रहे सोने के दामों पर अब ब्रेक लग गया है। चांदी की कीमतों में गिरावट के बाद अब सोने के भाव भी धड़ाम हो गए हैं। इंटरनेशनल मार्केट में सोना अपने रिकॉर्ड हाई $4,643 प्रति औंस से फिसलकर $4,580 के स्तर पर आ गया है।
आखिर रातों-रात ऐसा क्या हुआ कि सोने की चमक फीकी पड़ गई? क्या यह गिरावट जारी रहेगी या फिर से दाम बढ़ेंगे? आइए जानते हैं वो 5 बड़े कारण जिन्होंने मार्केट का गणित बदल दिया है।
1. अमेरिकी अर्थव्यवस्था की मजबूती (US Economic Data)
सोने की कीमतों में गिरावट की सबसे पहली और बड़ी वजह है अमेरिका से आए आर्थिक आंकड़े। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिकी इकोनॉमी अभी भी काफी मजबूत स्थिति में है।
Retail Sales: अमेरिका में रिटेल सेल्स में 0.6% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो बाजार के अनुमान से कहीं ज्यादा है।
PPI Index: प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (PPI) में 3% की सालाना बढ़त देखी गई है।
Unemployment Rate: बेरोजगारी दर गिरकर 4.4% पर आ गई है।
जब अमेरिका की आर्थिक स्थिति मजबूत होती है, तो निवेशकों का भरोसा डॉलर पर बढ़ता है और वे सोने से पैसा निकालकर सुरक्षित वित्तीय संपत्तियों में लगाने लगते हैं।
2. ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें धुंधली पड़ना
बाजार पहले यह उम्मीद कर रहा था कि फेडरल रिजर्व 2026 की शुरुआत में ही ब्याज दरों में कटौती शुरू कर देगा, लेकिन अब हालात बदल गए हैं। मॉर्गन स्टेनली (Morgan Stanley) जैसे बड़े निवेश बैंकों का मानना है कि दरें कम होने में अब 2026 के मध्य तक का समय लग सकता है। चूंकि सोना बिना ब्याज वाला एसेट है, इसलिए ऊंची ब्याज दरों के बीच इसकी मांग कम होने लगती है, जिससे कीमतों पर दबाव बनता है।
3. डॉलर इंडेक्स में मजबूती
अमेरिकी डॉलर इंडेक्स इस समय करीब 99.10 पर मजबूती के साथ खड़ा है। नियम यह है कि जब भी डॉलर मजबूत होता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर में ट्रेड होने वाला सोना अन्य देशों के निवेशकों के लिए महंगा हो जाता है। इसी वजह से डिमांड घटती है और कीमतों में गिरावट आती है।
4. भू-राजनीतिक तनाव में कमी (Geopolitical Shift)
सोने को हमेशा संकट के समय ‘सुरक्षित निवेश’ (Safe Haven) माना जाता है। पिछले कुछ समय से ईरान और मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण सोना महंगा हो रहा था। लेकिन हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयानों ने बाजार को राहत दी है। ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि हालात नियंत्रण में हैं और फिलहाल किसी बड़े युद्ध का खतरा नहीं है। तनाव कम होते ही निवेशकों ने सोने से मुनाफावसूली (Profit Booking) शुरू कर दी।
5. तकनीकी कारण और कंसॉलिडेशन (Technical Factors)
मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि सोने की कीमतों में आई यह गिरावट एक ‘हेल्दी करेक्शन’ है। लगातार रैली के बाद बाजार में थोड़ी थकान दिख रही थी। तकनीकी चार्ट पर सोना अभी भी अपने शॉर्ट-टर्म और मिड-टर्म मूविंग एवरेज से ऊपर है, जिसका मतलब है कि लंबी अवधि में अभी भी सोने का ट्रेंड मजबूत (Bullish) बना हुआ है। फिलहाल सोना एक सीमित दायरे में कारोबार कर सकता है जिसे ‘कंसॉलिडेशन’ कहा जाता है।
आगे क्या होगा?
भले ही अभी कीमतें नीचे आई हैं, लेकिन फेड चेयर जेरोम पॉवेल पर राजनीतिक दबाव और मिडिल ईस्ट की अनिश्चितता अभी भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। अगर आने वाले समय में फिर से राजनीतिक अस्थिरता बढ़ती है, तो सोने की कीमतों को दोबारा सपोर्ट मिल सकता है। फिलहाल, छोटे निवेशकों के लिए यह गिरावट खरीदारी का एक मौका हो सकती है।
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