नई दिल्ली: दुनिया के नक्शे से एक ऐसी खबर सामने आ रही है जिसने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भूचाल ला दिया है। अमेरिका ने वेनेजुएला पर एक बड़ा हमला करते हुए वहां के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को उनके ही देश से गिरफ्तार कर लिया है। अमेरिकी विशेष बल (डेल्टा फोर्स) मादुरो को पकड़कर न्यूयॉर्क ले जा चुका है, जहां उन पर अब आपराधिक मुकदमे चलाए जाएंगे। लेकिन अमेरिका की इस ‘कमांडो स्टाइल’ कार्रवाई ने पूरी दुनिया को दो फाड़ कर दिया है और कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
‘जंगल राज’ का नया उदाहरण: वाएल अव्वाद
वेनेजुएला के खिलाफ इस सीधी कार्रवाई को लेकर भारत के जाने-माने अंतरराष्ट्रीय मामलों के एक्सपर्ट वाएल अव्वाद ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने अमेरिका के इस कदम की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि आज की दुनिया में अंतरराष्ट्रीय नियमों की कोई अहमियत नहीं रह गई है।
अव्वाद ने सवाल उठाते हुए कहा, “हम आखिर किस दुनिया में रह रहे हैं? क्या अब यहां जंगल का कानून चलेगा? अमेरिका ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि उसके लिए न तो कोई अंतरराष्ट्रीय कानून मायने रखता है और न ही संयुक्त राष्ट्र (UN) का चार्टर।” उन्होंने आगे कहा कि अमेरिका ने हमेशा अपनी मर्जी थोपी है। जो हाल उसने अफगानिस्तान, इराक, सीरिया और लीबिया का किया, वही अब वह तेल से मालामाल वेनेजुएला के साथ कर रहा है। सत्ता परिवर्तन के लिए ताकत का ऐसा इस्तेमाल बेहद खतरनाक है।
कैसे हुई मादुरो की गिरफ्तारी?
यह पूरा घटनाक्रम किसी हॉलीवुड फिल्म की स्क्रिप्ट जैसा नजर आता है। शनिवार तड़के अमेरिकी ‘डेल्टा फोर्स’ ने वेनेजुएला के एक आर्मी बेस पर अचानक धावा बोल दिया। इस गुप्त ऑपरेशन के दौरान अमेरिकी सैनिकों ने राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को हिरासत में ले लिया।
गिरफ्तारी के तुरंत बाद, दोनों को एक अमेरिकी वॉर शिप (युद्धपोत) के जरिए न्यूयॉर्क ले जाया गया। अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि मादुरो पर ‘नार्को-टेररिज्म’ (नशीले पदार्थों के जरिए आतंकवाद को बढ़ावा देना) के गंभीर आरोप हैं और अब उन पर फेडरल कोर्ट में मुकदमा चलाया जाएगा।
संयुक्त राष्ट्र में खलबली, कल होगी इमरजेंसी मीटिंग
अमेरिका की इस हिमाकत ने संयुक्त राष्ट्र (UN) के गलियारों में तनाव बढ़ा दिया है। इस घटना के बाद सोमवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की एक आपातकालीन बैठक बुलाई गई है।
संयुक्त राष्ट्र में सोमालिया के स्थायी मिशन की प्रवक्ता खदीजा अहमद ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि सोमवार सुबह 10 बजे इस मुद्दे पर चर्चा होगी। वहीं, संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंतोनियो गुटेरेस ने भी इस पर गहरी चिंता जताई है। गुटेरेस का मानना है कि किसी संप्रभु देश के राष्ट्रपति के साथ ऐसा व्यवहार अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक ‘बेहद खतरनाक उदाहरण’ पेश कर सकता है, जिससे भविष्य में वैश्विक शांति को खतरा पैदा होगा।
अब सबकी नजरें कल होने वाली सुरक्षा परिषद की बैठक पर टिकी हैं। क्या दुनिया के अन्य देश अमेरिका की इस कार्रवाई का समर्थन करेंगे या फिर वाशिंगटन को अंतरराष्ट्रीय मंच पर कड़े विरोध का सामना करना पड़ेगा? यह देखना दिलचस्प होगा।
अस्वीकरण: इस लेख में दी गई जानकारी इंटरनेट पर उपलब्ध सार्वजनिक स्रोतों से एकत्रित की गई है। पाठकों से अनुरोध है कि वे इस जानकारी को उपलब्ध स्रोतों से सत्यापित करें।








