बीजिंग/वॉशिंगटन: अमेरिका और चीन के बीच चल रही ‘टेक्नोलॉजी की जंग’ (Tech War) अब एक ऐसे मोड़ पर आ गई है, जिसकी कल्पना शायद वॉशिंगटन ने नहीं की थी। नए साल के मौके पर चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने जो संदेश दिया है, उसने न केवल अमेरिकी प्रशासन बल्कि दुनिया की सबसे बड़ी चिप कंपनी Nvidia की भी नींद उड़ा दी है। ट्रंप सरकार द्वारा लगाए गए कड़े प्रतिबंधों के बीच चीन ने अपनी तकनीकी ताकत का ऐसा प्रदर्शन किया है, जिसने पूरे सिलिकॉन वैली में खलबली मचा दी है।
आत्मनिर्भरता की राह पर चीन का ‘मास्टरस्ट्रोक’
राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अपने संबोधन में सीधे तौर पर अमेरिका और डोनाल्ड ट्रंप को चुनौती देते हुए कहा कि AI और सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में चीन की रफ्तार को कोई ताकत नहीं रोक सकती। जिनपिंग का यह बयान तब आया है जब अमेरिका ने चीन को एडवांस चिप्स से दूर रखने के लिए हर मुमकिन कोशिश की थी।
जिनपिंग ने साफ किया कि अमेरिका की पाबंदियां चीन के लिए रुकावट नहीं, बल्कि एक बड़ा अवसर बनकर उभरी हैं। उन्होंने गर्व से कहा कि आज चीन न केवल अपने खुद के AI मॉडल बना रहा है, बल्कि घरेलू चिप्स के मामले में भी आत्मनिर्भर हो रहा है। उन्होंने सीधे शब्दों में संकेत दिया कि अब चीन की कंपनियां Nvidia और OpenAI जैसे दिग्गजों को उनके ही मैदान में टक्कर देने के लिए तैयार हैं।
जब पाबंदियां ही बन गईं प्रगति का हथियार
बीजिंग से दुनिया को संबोधित करते हुए शी जिनपिंग ने दावा किया कि चीन अब दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती ‘इनोवेशन इकोनॉमी’ बन चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप और बाइडन प्रशासन के प्रतिबंधों का मकसद चीन को आधुनिक तकनीक से काट देना था, लेकिन हुआ इसका बिल्कुल उल्टा। चीनी कंपनियों ने बाहरी मदद पर निर्भर रहने के बजाय खुद की रिसर्च और डेवलपमेंट (R&D) पर सारा जोर लगा दिया। जिनपिंग ने जोर देकर कहा कि चीन के घरेलू AI मॉडल अब ग्लोबल लेवल पर टॉप पर पहुंचने की रेस में हैं।
DeepSeek AI: वो नाम जिसने Nvidia को हिला दिया
इस टेक वॉर में सबसे बड़ा धमाका तब हुआ जब चीनी स्टार्टअप DeepSeek AI ने अपना ‘R1’ मॉडल पेश किया। इस मॉडल ने सिलिकॉन वैली के दिग्गजों को पछाड़ते हुए OpenAI को कड़ी टक्कर दी। इस एक ऐलान का असर यह हुआ कि मार्केट में Nvidia के शेयरों में 17% तक की भारी गिरावट देखी गई। निवेशकों को अब डर सताने लगा है कि अगर चीन ने खुद की सस्ती और बेहतर चिप्स और AI मॉडल बना लिए, तो अमेरिकी कंपनियों का एकाधिकार खत्म हो जाएगा।
क्या अब बहुत देर हो चुकी है?
साल 2025 के अंत में डोनाल्ड ट्रंप ने डैमेज कंट्रोल की कोशिश करते हुए Nvidia को चीन के चुनिंदा ग्राहकों को H200 चिप्स बेचने की अनुमति दी थी। लेकिन जानकारों का कहना है कि तब तक चिड़िया खेत चुग चुकी थी। चीन अब आत्मनिर्भरता की उस राह पर निकल चुका है जहाँ से पीछे मुड़ना नामुमकिन है। ब्रिटेन की बड़ी निवेश फर्म ‘रफर’ (Ruffer) जैसी कंपनियां अब अलीबाबा जैसी चीनी कंपनियों में अपना निवेश बढ़ा रही हैं, जो इस बात का सबूत है कि दुनिया का भरोसा अब चीन की टेक पावर पर बढ़ रहा है।
कुल मिलाकर, अमेरिका का जो दांव चीन को कमजोर करने के लिए था, उसने चीन को अपने पैरों पर खड़ा होने के लिए मजबूर कर दिया। अब सवाल यह है कि क्या अमेरिका अपनी इस रणनीति को बदल पाएगा या फिर टेक्नोलॉजी की इस वैश्विक रेस में वह अपनी बढ़त खो देगा?
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