इंदौर/भोपाल: मध्य प्रदेश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर से आई एक दुखद खबर ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। दूषित पानी पीने से हुई मासूमों और नागरिकों की मौत के मामले ने अब एक बड़ा राजनीतिक मोड़ ले लिया है। इस घटना को लेकर जहां विपक्ष पहले से ही हमलावर था, वहीं अब भाजपा की फायरब्रांड नेता और पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
उमा भारती ने मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व वाली सरकार पर सीधा और तीखा हमला करते हुए इस घटना को ‘महापाप’ करार दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस अपराध के लिए केवल इंदौर के मेयर ही नहीं, बल्कि पूरी मध्य प्रदेश सरकार और प्रशासन भी कटघरे में खड़ा है।
‘दो लाख में नहीं बिकती जिंदगी’, मुआवजे पर उठाया सवाल
उमा भारती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ (पहले ट्विटर) पर एक के बाद एक कई पोस्ट कर अपना गुस्सा जाहिर किया। उन्होंने सरकार द्वारा घोषित मुआवजे को नाकाफी बताया। उमा ने कहा, “किसी की जिंदगी की कीमत दो लाख रुपए नहीं हो सकती। मृतक के परिजन जीवन भर उस दुख को झेलते हैं। इस पाप का प्रायश्चित करना होगा। सरकार को पीड़ित परिवारों से माफी मांगनी चाहिए और छोटे अधिकारियों से लेकर ऊपर तक के सभी जिम्मेदारों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए।”
स्वच्छता के तमगे पर लगा दाग
इंदौर, जो लगातार देश के सबसे स्वच्छ शहर का खिताब जीतता आया है, वहां हुई इस घटना ने व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। उमा भारती ने तंज कसते हुए कहा कि जिस शहर को स्वच्छता के लिए अवॉर्ड मिलता है, वहां इतनी गंदगी और जहर मिला पानी लोगों की जान ले रहा है, यह पूरे प्रदेश और व्यवस्था के लिए शर्मिंदगी की बात है।
‘जब आपकी चली नहीं, तो बिसलेरी क्यों पीते रहे?’
उमा भारती ने उन अधिकारियों और नेताओं को भी आड़े हाथों लिया जो जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हैं। उन्होंने बिना नाम लिए हमला करते हुए कहा, “इंदौर मामले में यह कौन कह रहा है कि हमारी चली नहीं? अगर आपकी नहीं चल रही थी, तो आप पद पर बैठकर बिसलेरी का पानी क्यों पीते रहे? आपको पद छोड़कर जनता के बीच जाना चाहिए था। ऐसे पापों का कोई स्पष्टीकरण नहीं होता, सिर्फ दंड होता है।”
मोहन यादव की ‘अग्निपरीक्षा’
पूर्व मुख्यमंत्री ने इसे मुख्यमंत्री मोहन यादव के लिए परीक्षा की घड़ी बताया है। उन्होंने कहा कि यह देखना होगा कि सरकार दोषियों पर क्या कार्रवाई करती है। इसी बीच, उमा भारती ने यह भी जानकारी दी कि उनकी आंखों की सर्जरी हुई है, जिसकी वजह से वह अगले 7 दिनों तक जनता के बीच नहीं आ पाएंगी और न ही किसी से मुलाकात कर सकेंगी। उन्होंने डॉक्टरों की सलाह का हवाला देते हुए धूप और धूल से बचने की बात कही है।
इंदौर की इस घटना ने अब मध्य प्रदेश की सियासत में उबाल ला दिया है। अब देखना यह है कि अपनी ही पार्टी की दिग्गज नेता के इन तीखे सवालों का मोहन यादव सरकार क्या जवाब देती है।
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